शनिवार, 9 मई 2009

नतुन स्वप्न


एखनो विनिद्र रजनी जागिया
सजनी जाले आधारे आलो

एखनो देखिनी प्रभात सुदिन
तबुओ स्वप्न साजाइ भालो

आशार तरीटी भाषाये सागरे
ऐ कूल भेंगे ओ कुल गड़ी

स्तिमित आलोर प्रदीप जालाये
दियेछि
जीवन सिन्धु पाड़ी


-उत्तम शर्मा
संयोजक- भारतीय इन्साफ मोर्चा
मूल
कविता बंगला भाषा में

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काशिफ आरिफ

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