प्रिये पाठको और दोस्तों,
मुझे यह बताते हुए बड़ी खुशी हो रही है की मैं वापस अपने ब्लॉग पर आ गया हूँ, काफ़ी कोशिश की अपने आपको अपने कंप्यूटर और अपने ब्लॉग से दूर रखने की लेकिन नाकामयाब रहा, इस बीच कोई पोस्ट तो नहीं लिखी लेकिन हाँ टिप्पणी ज़रूर करता रहा....
अब मैं वापस आ गया हूँ बहुत जल्द आपको मेरी पोस्ट पढने को मिलेगी, मुझे अपने ब्लॉग को नया रूप भी देना है वो काम भी अधुरा ही पड़ा है उसे भी पूरा करना है...
अच्छा खुदा हाफिज़, आप सब अपना ख्याल रखियेगा
आपका अपना
काशिफ आरिफ
धर्म, जात - पात को एक तरफ़ रख कर हिन्दुस्तान को एक सूत्र के पिरोने की कोशिश....
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सोमवार, 18 मई 2009
सोमवार, 1 सितंबर 2008
आप जैसे ज्ञानी लोगो की टिप्पणी पाकर मैं धन्य हो गया
सर्वप्रथम आप जैसे ज्ञानी लोगो की टिप्पणी पाकर मैं धन्य हो गया,
मेरे मन में शंका थी इसलिए मैंने यह पोस्ट लिखी थी क्यूंकि जितना मुझे पता लगा मैंने लिखा बाकी जो बचा वो आप लोगो ने बता दिया, आप लोग मुझसे बहुत बड़े हैं, और आप लोग बहुत ज्ञानी है मैं तो अज्ञानी जो कुछ ज्ञान पाना चाहता है,
अगर इस पोस्ट से आप लोगो में से किसी की भावनाओ को ठेस पहुची हो तो मैं आप लोगो से क्षमा मांगता हूँ ।
लेकिन जैसा की दिनेशराय द्विवेदी जी ने कहा है "यह जगत जिस योनि से उपजा है उसे धारण करने वाले को भगवान कहते हैं। आप के अर्थ को भी लें तो योनि का स्वामित्व तो स्त्री का ही है। इस कारण से स्त्री ही भगवान हुई न कि उस का पती ।"
तो आप लोग कृपया करके मेरी एक शंका और दूर करे "ईश्वर और भगवान एक शक्ति के दो अलग - अलग नाम है या फिर दोनों के अलग - अलग अर्थ है?
मेरा यह प्रश्न शायद आप लोगो को बचकाना लगे लेकिन अगर आप लोग इसका उत्तर दे देंगे तो मैं धन्य हो जाऊंगा और मुझ जैसे अज्ञानी को कुछ ज्ञान प्राप्त हो जाएगा ।
धन्यवाद
जय हिंद ।
मेरे मन में शंका थी इसलिए मैंने यह पोस्ट लिखी थी क्यूंकि जितना मुझे पता लगा मैंने लिखा बाकी जो बचा वो आप लोगो ने बता दिया, आप लोग मुझसे बहुत बड़े हैं, और आप लोग बहुत ज्ञानी है मैं तो अज्ञानी जो कुछ ज्ञान पाना चाहता है,
अगर इस पोस्ट से आप लोगो में से किसी की भावनाओ को ठेस पहुची हो तो मैं आप लोगो से क्षमा मांगता हूँ ।
लेकिन जैसा की दिनेशराय द्विवेदी जी ने कहा है "यह जगत जिस योनि से उपजा है उसे धारण करने वाले को भगवान कहते हैं। आप के अर्थ को भी लें तो योनि का स्वामित्व तो स्त्री का ही है। इस कारण से स्त्री ही भगवान हुई न कि उस का पती ।"
तो आप लोग कृपया करके मेरी एक शंका और दूर करे "ईश्वर और भगवान एक शक्ति के दो अलग - अलग नाम है या फिर दोनों के अलग - अलग अर्थ है?
मेरा यह प्रश्न शायद आप लोगो को बचकाना लगे लेकिन अगर आप लोग इसका उत्तर दे देंगे तो मैं धन्य हो जाऊंगा और मुझ जैसे अज्ञानी को कुछ ज्ञान प्राप्त हो जाएगा ।
धन्यवाद
जय हिंद ।
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