सर्वप्रथम आप जैसे ज्ञानी लोगो की टिप्पणी पाकर मैं धन्य हो गया,
मेरे मन में शंका थी इसलिए मैंने यह पोस्ट लिखी थी क्यूंकि जितना मुझे पता लगा मैंने लिखा बाकी जो बचा वो आप लोगो ने बता दिया, आप लोग मुझसे बहुत बड़े हैं, और आप लोग बहुत ज्ञानी है मैं तो अज्ञानी जो कुछ ज्ञान पाना चाहता है,
अगर इस पोस्ट से आप लोगो में से किसी की भावनाओ को ठेस पहुची हो तो मैं आप लोगो से क्षमा मांगता हूँ ।
लेकिन जैसा की दिनेशराय द्विवेदी जी ने कहा है "यह जगत जिस योनि से उपजा है उसे धारण करने वाले को भगवान कहते हैं। आप के अर्थ को भी लें तो योनि का स्वामित्व तो स्त्री का ही है। इस कारण से स्त्री ही भगवान हुई न कि उस का पती ।"
तो आप लोग कृपया करके मेरी एक शंका और दूर करे "ईश्वर और भगवान एक शक्ति के दो अलग - अलग नाम है या फिर दोनों के अलग - अलग अर्थ है?
मेरा यह प्रश्न शायद आप लोगो को बचकाना लगे लेकिन अगर आप लोग इसका उत्तर दे देंगे तो मैं धन्य हो जाऊंगा और मुझ जैसे अज्ञानी को कुछ ज्ञान प्राप्त हो जाएगा ।
धन्यवाद
जय हिंद ।