दुनिया में अगर दर्द का मौसम नही होता -
चेहरों पे तबस्सुम का ये आलम नही होता ।
क्या चीज मुहब्बत है ये हम कैसे समझते -
अश्को से अगर दामने दिल नम नही होता ।
इक वो है की माथे पे हमावत है शिकने-
इक मैं हूँ कि किसी हाल में वह हम नही होता।
-डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल 'राही '
धर्म, जात - पात को एक तरफ़ रख कर हिन्दुस्तान को एक सूत्र के पिरोने की कोशिश....
दर्द लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
दर्द लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बुधवार, 27 मई 2009
शनिवार, 9 मई 2009
ख़ुद को समझो खुदा समझ लोगे

दर्द समझो दवा समझ लोगे।
ज्योति समझो दीया समझ लोगे ।
व्यर्थ देरी हरम में उलझे हो -
ख़ुद को समझो खुदा समझ लोगे ।
कंगन कभी न टूटे ऐसा कोई हाथ नही है।
चंदन कभी न छूटे ऐसा कोई माथ नही है ।
चारो और भीड़ अपनों की लेकिन रिश्तो का-
बंधन कभी न टूटे ऐसा कोई साथ नही है ।
प्यार की पहचान लेकर जी रहा हूँ।
दर्द का उनमान लेकर जी रहा हूँ ।
जाति भाषा धर्म से आहत हुआ -
अधमरा इंसान लेकर जी रहा हूँ ।।
ये अहिंसा मेरा मन्दिर मेरी आजादी है
कर्म से भाग न पाये वो मुनादी है॥
डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल 'राही'
सदस्यता लें
संदेश (Atom)