डिवाइडर पर कुछ सुखे पेडधर्म, जात - पात को एक तरफ़ रख कर हिन्दुस्तान को एक सूत्र के पिरोने की कोशिश....
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बुधवार, 15 जुलाई 2009
इनका रखवाला कौन?
आगरा में पिछ्ले कुछ दिनों से "आगरा नगर निगम" की देखरेख में आगरा की "लाइफ़ लाइन" महात्मा गांधी मार्ग की मरम्मत का काम चल रहा है। शुरुआत सडक के बीच मे बने "डिवाइडर" से की गयी है, इस पर लगे टुटें टाइल्स को बदलकर नये लगायें जा रहे है और फिर उस पर रंग किया जायेगा। उसके बाद कई जगह सडक को चौडा भी किया जायेगा। हमारी मेयर अंजुला जी, ने ये आदेश दिया जो कि बहुत अच्छा कदम है लेकिन मेरी उनसे एक शिकायत है कि वो इन सब के बीच में एक बहुत महत्वपुंर्ण बात भुल गयी है वो ये कि वो जिस "डिवाइडर" कि मरम्मत करा रही है उस डिवाइडर पर लगे पेडों को भी उनकी तवज्जों की ज़रुरत हैं।
डिवाइडर पर कुछ सुखे पेड
डिवाइडर पर कुछ सुखे पेडमंगलवार, 7 जुलाई 2009
सुख रहा है हिन्दुस्तान का दिल..!!

हमारे "हिन्दुस्तान का दिल" यानी "मध्यप्रदेश" . ये राज्य हमारे देश के बीच मे स्थित है और अपने हैन्डीक्राफ़्ट मतलब हाथ की कारीगरी के लिये बहुत मशहुर है। आजकल वहां के हालात बहुत खराब है पीने के लिये पानी नही है। पानी जिसके बिना कुछ भी नही है वो वहां उपलब्ध नही है...हाहाकार मचा हुआ है..
अभी १३ मई को भोपाल मे एक घर मे मां, बाप और भाई मारे गये है टुटी हुई पाइप लाइन से पानी भरने की लडाई मे। अब तक पुरे मध्य प्रदेश मे मई के महीने मे ही ५० से ज़्यादा मारपीट की घटनायें हो चुकी है। हालात दिन ब दिन खराब होते जा रहे है। इस प्रदेश के कई शहरों मे दस - दस दिन पानी नही आता है। एक एक करके सारी नहरे, तालाब, नदियां सब सुखते जा रहे है....अब तक पुरे मध्य प्रदेश मे कुल मिलाकर १० - १५ तालाब पुरी तरह सुख चुके है और जो बचे है वो इस लायक नही बचे है की उन्का पानी पीने के काम मे लिया जाये। अकेले भोपाल मे छोटे-बडें मिलाकर १० तालाब और झीलें है लेकिन अब किसी मे भी पानी नही है। मध्यप्रदेश मे तो दो - तीन शहर तो ऐसे है जो तालाब और झील की वजह से बसे है लेकिन उन शहरों मे आज सब कुछ है सिवाय उन तालाब और झीलों के।

मध्य प्रदेश की लाइफ़ लाइन नर्मदा नदी जिससे मध्य प्रदेश की पानी की आधे से ज़्यादा ज़रुरत पुरी होती है। जिसके लिये लोगो के दिल मे बहुत आस्था है उसका आकार दिन ब दिन सिकुडता जा रहा है इस नदी का हाल भी हमारे देश की दुसरी नदियो की तरह होता जा रहा है जिनके अन्दर सिर्फ़ कीचड, केमीकल, और मरी हुई मछलियों के अलावा कुछ भी नही है। जिन लोगो के मन मे इन नदियों के लिये आस्था है इनकी बर्बादी के ज़िम्मेदार भी वही लोग है जो ज़रुरत पडने पर ही इन नदियों की तरफ़ देखते है और फ़िर इन्हे भुल जाते है। न खुद कुछ करते है और ना गलत करने वाले को रोकते है। टोकने पर कहते है की ये तो सरकार की ज़िम्मेदारी है मानता हुं की सरकार की ज़िम्मेदारी है लेकिन इन नदियों का इस्तेमाल कौन करता है? जब हम लोग इस्तेमाल करते है तो हमारी कोई ज़िम्मेदारी नही बनती है? मैं ये नही कह रहा की जाओ और खुद सफ़ाई करो या जो नदी को गंदा कर रहे है उनसे लडों लेकिन कम से कम हम सरकार का ध्यान तो इस तरफ़ दिला सकते है और थोडे - थोडे दिनो बाद उनसे सवाल करते रहें की आप लोग क्या कर रहे है।
और भुजल का तो बहुत बुरा हाल है महोबा, देवास, रेह्ती, मालवा, जैसे बहुत से इलाके है जहां पर भुजल स्तर बहुत नीचे चला गया है कहीं पर ४५० फ़ीट, कहीं ५०० फ़ीट, और तो और कुछ इलाको मे ६५० फ़ीट पर भी पानी नही है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल जो एक बहुत बडा शहर है और काफ़ी खुबसुरत है। भोपाल मे कभी छोटे-बडे १० तालाब और झीले थी अब उनमें से कुछ ही बची है। भुजल स्तर दिन ब दिन नीचे जाता जा रहा है कुछ इलाको मे ६०० फ़ीट पर भी पानी नही है।भोपाल अब कंक्रीट का जंगल बन चुका है ना वहां तालाब बचे है और ना ही पेड इस वजह से बारिश भी बहुत कम हो गयी है। ये तालाब और झीलों, ज़मीन और बारिश से भी पानी आया तो कहां गया इतना पानी? किसने इस्तेमाल किया? किसने बर्बाद किया? कौन है इसका ज़िम्मेदार? किसकी गलती है?
हमारी गलती है हमने पानी को अपनी जागीर समझा, जब हम एक बाल्टी से नहा सकते थे तो हमने शावर और बाथटब का इस्तेमाल किया, हमने शेव करते, बर्श करते वक्त नल को खुला छोडा जबकी उसकी ज़रुरत नही थी। जिनके घर मे पानी आता है या फिर उनके घर मे सम्रसीबिल पम्प या मोटर लगी है वो अपने घर को पाइप से धोते है घर के अलावा सडक को भी धोते है। आप धोयें मै धोने को मना नही कर रहा हुं लेकिन जो काम ३०-४० लीटर पानी से हो सकता है उसके लिये १५० लीटर पानी बहाने का क्या मतलब है।
ज़्यादातर शहरों मे पुरे - पुरे महीने पानी नही आ रहा है लोग पुरी - पुरी रात जाग रहे है पानी के इन्तेज़ार में। जिन शहरो मे पानी नही है वहां नगर निगम के लोग टैंकर से पानी सप्लाई कर रहे है जब ये टैंकर सडक से गुज़रता है तो लोग इसके पीछे भागते है। हमेशा लडाई होती है क्यौंकी हर आदमी पहले पानी भरना चाहता है अब हर टैंकर के साथ एक पुलिसवाला लगाया जाता है लेकिन वो भी लोगो को काबु मे नही रख पाता है।

मध्य प्रदेश मे इन दो - तीन मे अब तक १०-१२ लोग मौत के मुहं मे जा चुके है पानी की लडाइयों में और कई सौ घायल हो चुके है। हालात बहुत खराब है और दिन ब दिन खराब होते जा रहे है। हमारे देश के एक प्रदेश मे जलयुद्ध शुरु हो चुका है और अब देखना ये है की इस जलयुद्ध को हमारे देश और फिर दुनिया मे फैलने मे कितना वक्त लगता है......
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मंगलवार, 26 मई 2009
आगरा मे घोर संकट...!!
आगरा मे घोर संकट आया हुआ है.... किसी भी चीज़ के लिए पानी नही है हर तरफ़ हाहाकार मचा हुआ है... यमुना एक पतली नाली का रूप ले चुकी है उसमे अब कुछ भी नहीं बचा है... पानी के लिए लडाई हो रही है हर तरफ़ बुरा हाल है॥
कुछ इलाको मे दिन मे ३ बार पानी आता है, वो लोग पाइप लगाकर अपना घर धोते है, और कुछ जगह पन्द्रह - पन्द्रह दिन तक पानी नही आता है, वहां लोग नहाने के लिए पानी की तलाश करते है. मैं भी ऐसे ही इलाके मे रहता हूँ जिसे "नाई की मंडी" कहते है, यहाँ पर पानी "शाहगंज वाटर टेंक" से सप्लाई होता है, हम सुबह तीन बजे उठते हैं और फिर पानी आने का इंतज़ार करते है, अगर पानी आता है तो सिर्फ़ चौराहे के पास जिनके घर है उन्हें मिल जाता है क्यूंकि उसमे इतना प्रेशर नही होता की वो अन्दर तक पहुच सके, आख़िर मे यह होता की "नाई की मंडी" के बीच मे पड़ने वाले "छोटा गालिब पुरा" के लोगो को जो तीन बजे सुबह से जाग रहे थे उन्हें सिर्फ़ दस से पन्द्रह मिनट पानी मिलता है...
अब इसका अंजाम यह हो रहा है की सब लोग अपने घर पर submersible लगवा रहे है, अब जब submersible लगता है तो उसका पानी साफ़ करने के लिए आपको कम से कम पाँच हज़ार लीटर पानी बहाना होता है तब कहीं जाकर पानी मे से मिटटी साफ़ होती है.....
दादी के आँगन मे एक हैंडपंप लगा हुआ है जिसमे ३ साल पहले तक पानी आता था, उसकी गहराई ६७ फ़ुट थी, लेकिन अब उसने पानी देना बंद कर दिया है... दो दिन पहले मैंने अपने घर पर submersible लगवाया है पानी की कमी की वजह से, हमारे यहाँ पानी ११० फ़ुट की गहराई पर निकला है जबकि तीन साल पहले यह पानी ६७ फ़ुट पर निकला था मेरे और हमारी दादी के घर की दीवार मिली हुई है उस बोरिंग से इस बोरिंग की दूरी ज़्यादा से ज्यादा २५ फ़ुट होगी,
मैंने इसका इलाज ढूंढ लिया है मैंने पानी निकलने के बाद अपने submersible का पाइप उस सूखे हैंडपंप की बोरिंग मे डाल दिया पुरे दो दिन तक उसमे पानी चलता रहा...हमारा पानी साफ़ हो गया और पानी भी बरबाद नही हुआ,
अब मैं अपनी गली मे रहने वाले सब लोगो से बात करने वाला हूँ मेरा इरादा गली मे एक बोरिंग कराने का है जिसके अन्दर सारे घरो की छतो की नालियों से आने वाले पाइप जुड़े होंगे ताकि बारिश का सारा पानी जो नाली मे बह जाता है, वो सब ज़मीन के अन्दर जाए अब देखते ही की क्या होता यह सब लोग राज़ी होते है की नही ।
मुझे मालूम है की थोडी परेशानी होगी लेकिन मुझे उम्मीद है की काम हो जाएगा, आगे अल्लाह मालिक है.....
कुछ इलाको मे दिन मे ३ बार पानी आता है, वो लोग पाइप लगाकर अपना घर धोते है, और कुछ जगह पन्द्रह - पन्द्रह दिन तक पानी नही आता है, वहां लोग नहाने के लिए पानी की तलाश करते है. मैं भी ऐसे ही इलाके मे रहता हूँ जिसे "नाई की मंडी" कहते है, यहाँ पर पानी "शाहगंज वाटर टेंक" से सप्लाई होता है, हम सुबह तीन बजे उठते हैं और फिर पानी आने का इंतज़ार करते है, अगर पानी आता है तो सिर्फ़ चौराहे के पास जिनके घर है उन्हें मिल जाता है क्यूंकि उसमे इतना प्रेशर नही होता की वो अन्दर तक पहुच सके, आख़िर मे यह होता की "नाई की मंडी" के बीच मे पड़ने वाले "छोटा गालिब पुरा" के लोगो को जो तीन बजे सुबह से जाग रहे थे उन्हें सिर्फ़ दस से पन्द्रह मिनट पानी मिलता है...
अब इसका अंजाम यह हो रहा है की सब लोग अपने घर पर submersible लगवा रहे है, अब जब submersible लगता है तो उसका पानी साफ़ करने के लिए आपको कम से कम पाँच हज़ार लीटर पानी बहाना होता है तब कहीं जाकर पानी मे से मिटटी साफ़ होती है.....
दादी के आँगन मे एक हैंडपंप लगा हुआ है जिसमे ३ साल पहले तक पानी आता था, उसकी गहराई ६७ फ़ुट थी, लेकिन अब उसने पानी देना बंद कर दिया है... दो दिन पहले मैंने अपने घर पर submersible लगवाया है पानी की कमी की वजह से, हमारे यहाँ पानी ११० फ़ुट की गहराई पर निकला है जबकि तीन साल पहले यह पानी ६७ फ़ुट पर निकला था मेरे और हमारी दादी के घर की दीवार मिली हुई है उस बोरिंग से इस बोरिंग की दूरी ज़्यादा से ज्यादा २५ फ़ुट होगी,
मैंने इसका इलाज ढूंढ लिया है मैंने पानी निकलने के बाद अपने submersible का पाइप उस सूखे हैंडपंप की बोरिंग मे डाल दिया पुरे दो दिन तक उसमे पानी चलता रहा...हमारा पानी साफ़ हो गया और पानी भी बरबाद नही हुआ,
अब मैं अपनी गली मे रहने वाले सब लोगो से बात करने वाला हूँ मेरा इरादा गली मे एक बोरिंग कराने का है जिसके अन्दर सारे घरो की छतो की नालियों से आने वाले पाइप जुड़े होंगे ताकि बारिश का सारा पानी जो नाली मे बह जाता है, वो सब ज़मीन के अन्दर जाए अब देखते ही की क्या होता यह सब लोग राज़ी होते है की नही ।
मुझे मालूम है की थोडी परेशानी होगी लेकिन मुझे उम्मीद है की काम हो जाएगा, आगे अल्लाह मालिक है.....
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गुरुवार, 7 मई 2009
बूँद - बूँद को तरसते हम !!! मतदान बहिष्कार....
मैं आगरा के नाई की मंडी इलाके मे रहता हूँ यहाँ बहुत बुरे हालात हैं, पिछले एक महीने से पानी बिल्कुल भी नही आ रहा है...पहले कम पानी आता था लेकिन फिर भी थोड़ा बहुत आता था अब तो बिल्कुल भी नही आ रहा है। नाई की मंडी मे ५२ मोहल्ले हैं जिसमे से छोटा ग़ालिब पुरा, तोपखाना, गली भीखम खां, बड़ा ग़ालिब पुरा, और नालबंद चौराहे के इलाके मे शाहगंज की टंकी से सप्लाई होती है, यहाँ पर बड़ा ग़ालिब पुरा और नालबंद चौराहे पर रहने वाले लोगो को पानी मिल जाता है लेकिन छोटा ग़ालिब पुरा, तोपखाना, गली भीखम खां मे रहने वाले लोगो सुबह तीन बजे उठना पड़ता है पानी भरने के लिए उसमे से भी दस से पन्द्रह मिनट पानी आता है अब इस कन्डीशन मे कहाँ से आदमी का गुज़ारा होगा,
मैं भी इसी इलाके मे रहता हूँ, नाई की मंडी मे सबसे ज़्यादा बिजली का बिल, वाटर टैक्स छोटा गालिब पुरा, तोपखाना, गली भीखम खां, से जाता है लेकिन यहाँ के लोगो को सबसे कम पानी और बिजली मिलती है बहुत शिकायते की है, लेकिन कोई सुनवाई नही है अभी कुछ दिन पहले औरतो और बच्चो ने रोड जाम किया, थाने के घेराव किया, विधायक से शिकायत की, लेकिन नतीजा सिफर ही निकला अब तो एक बूँद भी नही आ रही है यह हालत यहाँ की तब है जब यहाँ का पार्षद कांग्रेस का है, मेयर भाजपा की, विधायक बी.स.पी. का, सांसद सपा का है॥
मुझे भी नहाने के लिए अपने बड़े भाई के घर जाना पड़ता है रोज़.....अब यहाँ की औरतो ने फ़ैसला कर लिया है की वो मतदान बहिष्कार करेंगी, मर्द तो एक बार को राज़ी हैं वोट देने के लिए लेकिन यहाँ की औरते राज़ी नही हैं बिल्कुल भी....देखते है की क्या होता है...
मैं भी इसी इलाके मे रहता हूँ, नाई की मंडी मे सबसे ज़्यादा बिजली का बिल, वाटर टैक्स छोटा गालिब पुरा, तोपखाना, गली भीखम खां, से जाता है लेकिन यहाँ के लोगो को सबसे कम पानी और बिजली मिलती है बहुत शिकायते की है, लेकिन कोई सुनवाई नही है अभी कुछ दिन पहले औरतो और बच्चो ने रोड जाम किया, थाने के घेराव किया, विधायक से शिकायत की, लेकिन नतीजा सिफर ही निकला अब तो एक बूँद भी नही आ रही है यह हालत यहाँ की तब है जब यहाँ का पार्षद कांग्रेस का है, मेयर भाजपा की, विधायक बी.स.पी. का, सांसद सपा का है॥
मुझे भी नहाने के लिए अपने बड़े भाई के घर जाना पड़ता है रोज़.....अब यहाँ की औरतो ने फ़ैसला कर लिया है की वो मतदान बहिष्कार करेंगी, मर्द तो एक बार को राज़ी हैं वोट देने के लिए लेकिन यहाँ की औरते राज़ी नही हैं बिल्कुल भी....देखते है की क्या होता है...
बुधवार, 11 जून 2008
कुदरत का कहर
भूगर्भ जल दिवस पर कानपूर डिस्ट्रिक्ट मे एक दिल दहलाने वाली घटना हुई । कानपूर जिले के हमीरपुर मे २४ घंटे के अन्दर ५ जगह ज़मीन फट गई । कहीं पर इस की चौडाई ढाई फीट थी कहीं पर इससे कम । तीन सौ मीटर तक लम्बी ज़मीन फटी है और उसकी गहराई २२ फीट से भी ज़्यादा थी ।
ये सब हम लोगो ने ही किया है इसके पीछे सब इंसानों का किया धरा है जब हम ज़मीन में पानी जाने की जगह नही छोडेंगे और ऊपर उसका अन्दर से सब पानी नीचोड़ कर निकाल लेंगे तो क्या होगा । हमने अपने घर के चारो तरफ़ पक्का चबूतरा बना दिया है । अपने आँगन मे हमने बहुत अच्छा सा मार्बल लगाया है, आस पास का सब एरिया हमने कवर कर लिया है, हमने कसम खाई है की कुछ भी हो जाए लेकिन हम बारिश के इस गंदे पानी को हम अपनी ज़मीन के अन्दर नही जाने देंगे ऐसे कैसे कोई हमारी ज़मीन ख़राब कर सकता है,
हम हमेशा ब्रुश करते वक्त नल को फुल रफ़्तार से खोलेंगे, हमेशा शावर से स्नान करेंगे, उसमे से खूब पानी बहायेंगे, देर तक अच्छी तरह मल मल कर स्नान करेंगे, अपना घर जब भी धोयेंगे तो हमेशा पाइप के तेज़ रफ़्तार पानी से धोयेंगे। हम इस ज़मीन के सारे पेड़ काट कर यहाँ बड़े बड़े पक्के मकान और इमारते बनायेंगे।
हम यहाँ पैदा हुए है और इस ज़मीन की हर चीज़ पर हमारा हक़ है हम जो चाहे करे, इसके लिए हमे किसी जो जवाब देने की ज़रूरत नही है और इसी तरह एक दिन हम इस ज़मीन को खोकला कर देगे।
ये कसम हम किसी हाल मे टूटने नही देगे और एक दिन जब ज़मीन मे पानी खत्म हो जायेगा तो हम इंसानों का खून पियेंगे।
ये सब हम लोगो ने ही किया है इसके पीछे सब इंसानों का किया धरा है जब हम ज़मीन में पानी जाने की जगह नही छोडेंगे और ऊपर उसका अन्दर से सब पानी नीचोड़ कर निकाल लेंगे तो क्या होगा । हमने अपने घर के चारो तरफ़ पक्का चबूतरा बना दिया है । अपने आँगन मे हमने बहुत अच्छा सा मार्बल लगाया है, आस पास का सब एरिया हमने कवर कर लिया है, हमने कसम खाई है की कुछ भी हो जाए लेकिन हम बारिश के इस गंदे पानी को हम अपनी ज़मीन के अन्दर नही जाने देंगे ऐसे कैसे कोई हमारी ज़मीन ख़राब कर सकता है,
हम हमेशा ब्रुश करते वक्त नल को फुल रफ़्तार से खोलेंगे, हमेशा शावर से स्नान करेंगे, उसमे से खूब पानी बहायेंगे, देर तक अच्छी तरह मल मल कर स्नान करेंगे, अपना घर जब भी धोयेंगे तो हमेशा पाइप के तेज़ रफ़्तार पानी से धोयेंगे। हम इस ज़मीन के सारे पेड़ काट कर यहाँ बड़े बड़े पक्के मकान और इमारते बनायेंगे।
हम यहाँ पैदा हुए है और इस ज़मीन की हर चीज़ पर हमारा हक़ है हम जो चाहे करे, इसके लिए हमे किसी जो जवाब देने की ज़रूरत नही है और इसी तरह एक दिन हम इस ज़मीन को खोकला कर देगे।
ये कसम हम किसी हाल मे टूटने नही देगे और एक दिन जब ज़मीन मे पानी खत्म हो जायेगा तो हम इंसानों का खून पियेंगे।
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