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बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

अपनी पहचान को तलाशता आगरा......ताजनगरी.....एक विरासतों का शहर

गरा ये वो नाम जिसे दुनिया के अरबों लोग जानते है......क्यौकि दुनिया का पहला अजुबा "ताजमहल" जिसे लोग मुहब्बत की मिसाल कहते है वो आगरा में है..।। आगरा को लोग तहज़ीब और विरासतों का शहर कहते हैं, हालंकि कुछ सालों से इसकी तहज़ीब और सुकुन को किसी की नज़र लग गयी है।

जिस शहर और इमारत की वजह से इस देश में हर साल अरबों रुपये की विदेशी मुद्रा मिलती है वो शहर आज भी अपनी पहचान और अपने अस्तित्व के लिये लड रहा है।

आज़ादी के बाद से इस शहर को सिर्फ़ एक फ़लाईओवर मिला है जो शहर के बाहर मथुरा-दिल्ली हाइवे पर १९९९ में बना था वो भॊ जब भगवान टाकीज़ चौराहे से दिल्ली के लिये निकलने में २-३ घन्टे लग जाते थे।  इसके अलावा विकास के नाम पर कुछ भी नही मिला।

बुधवार, 25 नवंबर 2009

अटल बिहारी वाजपेयी भी बाबरी विध्वंस के दोषी है... Atal Bihari Vajpayee Is Also Guilty Of Babri Demolition

कल लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट को सदन में पेश किया गया था जिसमें कुछ नया नही है सब पुरानी बातें जो हर हिन्दुस्तानी को पता है, कौन दोषी है?? किसने किया???? कौन था जिसने लोगों की भावनाओं को भडकाया?? कौन था जिसने ये सब प्लान किया?? बरहाल लिब्रहान आयोग नें आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी, कल्याण सिंह, उमा भारती, साध्वी रितम्भरा, मुरली मनोहर जोशी प्रमोद महाजन, विनय कटियार, अशोक सिंहल और प्रवीण तोगड़िया सहित पर्दे के पीछे से इन सभी को 'हांकने' वाले संघ नेतृत्व को दोषी ठहराया है।


रिपोर्ट सामने आने के बाद भाजपा ने अट्ल बिहारी वाजपेयी जी को दोषी ठहराने पर विरोध किया लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी भी दोषी है, अटल जी की छवि भारत में संघ द्वारा कुछ इस तरह की बनाई गई थी जिनके चेहरे पर एक मुखोटा लगा हुआ था जो कहता कुछ और था और करता कुछ और था।

अटल जी को सब कुछ पता था की 6 दिसम्बर 1992 को वहां क्या होने वाला है क्यौंकि वो भी संघ के इशारे पर काम करने वालों में से थे...इसका बयान उन्होने खुद अमेरिका में विहिप के कार्यकर्ताओं के सामने अपने आपको संघ का निष्ठावान कार्यकर्ता बताकर किया था।

शनिवार, 17 अक्टूबर 2009

दीपावली क्या है?? सारे हिन्दी ब्लोग्गर्स को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें...!! What Is Deepawali??? A Very Happy Deepawali To All Hindi Blogger's..!!

 आज "दीपावली" है। दीपावली का अर्थ है दीपों की पंक्ति। दीपावली हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे। अयोध्यावासियों का ह्रदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से उल्लासपूर्ण था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीए जलाए । कार्तिक मास की घनघोर काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं। अधिकतर यह पर्व ग्रिगेरियन कैलन्डर के अनुसार अक्तूबर या नवंबर महीने में पड़ती है। दीपावली दीपों का त्योहार है। इसे दीवाली या दीपावली भी कहते हैं। दिवाली अन्धेरे से रोशनी में जाने का प्रतीक है। भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है झूठ का नाश होता है। दिवाली यही चरितार्थ करती है - असतो माऽ सद्गमय , तमसो माऽ ज्योतिर्गमय

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2009

सारे भारतवासियों से अपील अपना विरोध दर्ज करायें... जुते पर गणेश, कृष्ण, बोद्ध के चित्र और अल्लाह, लिखा है.. One Appeal To All Indian Register Your Complain.. Photos Of Ganesh, Buddh, Krishana And Allah Written On Shoes

आज से दो दिन पहले बेरोज़गार ने एक लेख लिखा था जूते पर गणेश जी,कृष्ण,ॐ,बुद्ध,मदर टेरेसा के चित्र !! कोई इस्लामिक चिह्न क्यों नहीं? फ़िर उन्होने एक लेख और लिखा  मैं ग़लत था, इस वेबसाईट पर इस्लामिक प्रतीक भी हैं। अब तो हिंदू मुस्लिम एक हो जाओ !!!    इन दोनों लेखों मे उन्होने एक ZAZZLE

नामक वेबसाइट का ज़िक्र किया है इस वेबसाइट पर कुछ जुते बिक रहे है इन जुतों पर गणेश जी,कृष्ण,ॐ,बुद्ध,मदर टेरेसा के चित्र, और अल्लाह लिखा हुआ है। उन तस्वीरों में से कुछ यहां पर देखिये 







गुरुवार, 1 अक्टूबर 2009

नवरात्रों में देवी के भेंट चढें मेरे साथ २००-२५० लैंडलाईन कनेक्शन... 200-250 Landline Connection Was Destroyed On Navratra

(वैधानिक चेतावनी :- ये लेख मैं लिखता नही लेकिन सुरेश चिपलूनकर जी के एक लेख के वजह से मुझे ये लिखना पड रहा है। ये लेख कोई साम्प्रदायिक्ता बढाने वाला लेख नही है. मैं इस लेख के माध्यम से लोगों के दिमाग पर पडी मिट्टी हटाना चाहता हूं )

इस साल १९ सितम्बर से नवरात्रे शुरु हुऐ थे.....२१ सितम्बर हो ईद थी। मैं आगरा के नाई की मण्डी श्रेत्र में रहता हूं और नाई की मण्डी में बी.एस.एन.एल की फ़ोन लाईन आगरा फ़ोर्ट और बिजलीघर की तरफ़ से आती है। ये लाईन बिजलीघर से चल कर मंटोला होती हुई सदर भट्टी होती हुई सीधे नालबंद चौराहे को निकल जाती है।

हर साल तीसरे या चौथे नवरात्रे को सदरभटटी चौराहे के पास खोजा हवेली पर पंडाल लगाकर पुरा रास्ता बंद कर दिया जाता है और वहां देवी की पुजा की जाती है और आजतक किसी ने इस पर ऐतराज़ नही किया हालंकि इससे जुता कारीगरों और व्यापारियों को परेशानी होती उनको बहुत घुम कर हींग की मण्डी जाना पडता है लेकिन ये बात सिर्फ़ एक-दो दिन की होती है इसलिये कोई कुछ नही कहता है।


गुरुवार, 17 सितंबर 2009

मेरी जिन्दगी का मकसद दो वक्त की रोटी.... My life ambition two times food in a day

           मेरी ज़िन्दगी का मकसद "दो वक्त की रोटी"...... ये अलफ़ाज़ एक सात-आठ साल के बच्चे ने मुझसे कहे। कल मैं अपने भतीजे को स्कुल से ला रहा था तो सिग्नल एक सात-आठ साल का बच्चा मुझे भीख मागंने लगा ये सब पहले आगरा में नही होता था लेकिन पिछ्ले छ्ह-सात महीनों से यहां पर भी शुरु हो गया है। आमतौर पर मैं बच्चों, हट्टे-कट्टे और सही जिस्म वाले भिखारियों को भीख नही देता हूं...क्यौकि ये लोग मजबुर नही होते है ये भीख का कारोबार करते है और मैं उस लडके को काफ़ी वक्त से इस चौराहे पर देख रहा हूं वो मुझे रोज़ मिलता है लेकिन कल पहली बार उसने मुझसे भीख मांगी थी।

          मैने उसको मना कर दिया वो जाने लगा तो मेरे भतीजे उसे बुलाया "तुम्हारा नाम क्या है?" उसने जवाब दिया "मोनू"...  "कहां रहते हो?" उसने कहा "यहीं सडक पर"...."तुम्हारे मम्मी-पापा कहां है?" मेरे भतीजे ने उससे पुछा तो उसकी समझ में नही आया तो उसने दोबारा पुछा "तुम्हारे मां-बाप कहां है?" मेरे भतीजे और उसकी उम्र लगभग एक जैसी होगी....मैं अपने भतीजे का चेहरा देख रहा था कि ये छोटा बच्चा उससे कैसा सवाल कर रहा है.....उस लडके ने जवाब दिया :- "मां का पता नही बापू तो वहां शराब की दुकान पर बैठा है"

सोमवार, 10 अगस्त 2009

दुसरों को गरियाओं और मशहुर हो जाओं...!!! Abuse Other's And Get Famous...!!!

(वैधानिक चेतावनीइन दोनों उदाहरणों में पात्र घटनायें वास्तविक हैं, इनका जीवित व्यक्तियों से सम्बन्ध है, हिन्दी ब्लॉग जगत से तो बिलकुल है…)

दुसरों को गरियाओं और मशहुर हो जाओं..!!! आज के दौर का सबसे ज़्यादा पसंद किया जाने वाला तरीका....या ये कहें की हर दौर का मशहुर होने का सबसे आसान तरीका.....

विवादित बयान से पहले किसी को वरूण गांधी का नाम मालुम था??

विवादित टिप्पणी से पहले कोई रीता बहुगुंणा को जानता था????...... इस बात पर एक शायर की कही एक लाईन याद आ रही है...

शनिवार, 8 अगस्त 2009

अल्लाह, इस्लाम, कुरआन और मुसलमानों को गरियातें हिन्दी ब्लोग्गर...!!! Hindi Blogger's Abusing Allah, Islam, Qur-an And Muslim's

पिछ्ले ७-८ दिन से स्वच्छ सन्देश: हिन्दुस्तान की आवाज पर कुछ धर्मों के मुताल्लिक बह्स हो रही है जिसमें ये प्रथा होनी चाहिये या नही, वो होनी चाहिये या नही। मैं भी इस बहस में शामिल था क्यौंकि थोडी बहुत जानकारी इस नाचीज़ को भी है। बह्स सही चल रही थी लेकिन अचानक एक हिन्दी ब्लोग्गर ने अभ्रद भाषा का इस्तेमाल शुरु कर दिया और उसकी देखा देखी और लोग भी शुरु हो गये।

ये लोग कुरआन को बकवास करार दे रहे है, मुह्म्मद साहब को सबसे बडा गुनहगार बता रहे है और भी बहुत कुछ कहा है उन लोगो ने...जिससे मुझे बहुत तकलीफ़ पहुंची है.......

बुधवार, 22 जुलाई 2009

ये अंधविश्वास का ग्रहण कब हटेगा?

आज सुबह सुर्यग्रहण था बहुत से लोगो ने इस सदी के सबसे अनोखे नज़ारे को अपनी आखों से देखा, किसी ने इसे अपने सनग्लास से देखा, किसी ने एक्सरे फ़िल्म से देखा, किसी ने खास तौर पर "एल्युमिनाइज्ड माइलर" फ़िल्म से बने चश्मे से इसे देखा और हमेशा के लिये अपने दिलों-दिमाग में कभी ना मिटने वाली याद बसा ली लेकिन बहुत से ऐसे लोग भी है हमारे हिन्दुस्तान में इस अवधि में घर से नही निकलते, खाना नही खाते, कुछ तो पानी भी नही पीते, ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करके अपने आप को पवित्र करतें है और अपने घर को भी...मन्दिरों के दरवाज़ें कल शाम से बन्द थे वो ग्रहण के बाद ही खुलें! गर्भवती औरतों ने अपने प्रसव के लिये जो अपाय्न्मेंट था उसका वक्त बदलवा दिया और कुछ ने एक दिन आगे भी बढवा दिया।


डायंमण्ड रिंग का खुबसुरत नज़ारा





बुधवार, 15 जुलाई 2009

इनका रखवाला कौन?

गरा में पिछ्ले कुछ दिनों से "आगरा नगर निगम" की देखरेख में आगरा की "लाइफ़ लाइन" महात्मा गांधी मार्ग की मरम्मत का काम चल रहा है। शुरुआत सडक के बीच मे बने "डिवाइडर" से की गयी है, इस पर लगे टुटें टाइल्स को बदलकर नये लगायें जा रहे है और फिर उस पर रंग किया जायेगा। उसके बाद कई जगह सडक को चौडा भी किया जायेगा। हमारी मेयर अंजुला जी, ने ये आदेश दिया जो कि बहुत अच्छा कदम है लेकिन मेरी उनसे एक शिकायत है कि वो इन सब के बीच में एक बहुत महत्वपुंर्ण बात भुल गयी है वो ये कि वो जिस "डिवाइडर" कि मरम्मत करा रही है उस डिवाइडर पर लगे पेडों को भी उनकी तवज्जों की ज़रुरत हैं।

डिवाइडर पर कुछ सुखे पेड


शनिवार, 11 जुलाई 2009

दहश्तगर्दों के खिलाफ़ फ़तवा आखिर कब?

काफ़ी वक्त से ये सवाल हिन्दुस्तान की अवाम के दिमाग मे घुम रहा है की आखिर कब दहश्तगर्दों के खिलाफ़ फ़तवा जारी होगा। ११ सितम्बर के हादसे के बाद से पुरी दुनिया मे मुसलमानों के लिये हालात दिन ब दिन खराब होते जा रहे हैं।

इस्लाम क्या किसी धर्म में यह नही बताया गया है की दूसरे धर्म के लोगो को जीने ना दो, उन्हें और उन्हें धर्म स्थलों को तबाह कर दो.... इस्लाम तो अपने मानने वालो को कुरआन में आदेश देता है की "दुसरो के माबुदो (उपास्यो) को बुरा ना कहो (सूरा-ए-अलंफाल सुरह. ८ : आयत-१०८) |' पाक कुरआन में खुदा का हुक्म है, "जिसने एक बेकुसूर का कत्ल किया, गोया उसने सारी इंसानियत का कत्ल कर दिया" (सूरा-ए-अल्मायेदाह सुरह. ५ : आयत - 108) |' आख़िर यह कौन से जेहादी हैं और इनका कौन सा मज़हब है, जो बेगुनाह लोगो की जान लेने को इन्हे आतुर करता है | दिल्ली बम काण्ड को ले, तो यह बात समझ नही आती की क्या कोई सच्चा मुस्लिम, और वे भी रमजान के पाक महीने में ऐसा जघन्य पाप करेगा | साफ़ है, आतंक्वादियौं का कोई धर्म और ईमान नही होता |

मंगलवार, 7 जुलाई 2009

सुख रहा है हिन्दुस्तान का दिल..!!


हमारे "हिन्दुस्तान का दिल" यानी "मध्यप्रदेश" . ये राज्य हमारे देश के बीच मे स्थित है और अपने हैन्डीक्राफ़्ट मतलब हाथ की कारीगरी के लिये बहुत मशहुर है। आजकल वहां के हालात बहुत खराब है पीने के लिये पानी नही है। पानी जिसके बिना कुछ भी नही है वो वहां उपलब्ध नही है...हाहाकार मचा हुआ है..

अभी १३ मई को भोपाल मे एक घर मे मां, बाप और भाई मारे गये है टुटी हुई पाइप लाइन से पानी भरने की लडाई मे। अब तक पुरे मध्य प्रदेश मे मई के महीने मे ही ५० से ज़्यादा मारपीट की घटनायें हो चुकी है। हालात दिन ब दिन खराब होते जा रहे है। इस प्रदेश के कई शहरों मे दस - दस दिन पानी नही आता है। एक एक करके सारी नहरे, तालाब, नदियां सब सुखते जा रहे है....अब तक पुरे मध्य प्रदेश मे कुल मिलाकर १० - १५ तालाब पुरी तरह सुख चुके है और जो बचे है वो इस लायक नही बचे है की उन्का पानी पीने के काम मे लिया जाये। अकेले भोपाल मे छोटे-बडें मिलाकर १० तालाब और झीलें है लेकिन अब किसी मे भी पानी नही है। मध्यप्रदेश मे तो दो - तीन शहर तो ऐसे है जो तालाब और झील की वजह से बसे है लेकिन उन शहरों मे आज सब कुछ है सिवाय उन तालाब और झीलों के।







मध्य प्रदेश की लाइफ़ लाइन नर्मदा नदी जिससे मध्य प्रदेश की पानी की आधे से ज़्यादा ज़रुरत पुरी होती है। जिसके लिये लोगो के दिल मे बहुत आस्था है उसका आकार दिन ब दिन सिकुडता जा रहा है इस नदी का हाल भी हमारे देश की दुसरी नदियो की तरह होता जा रहा है जिनके अन्दर सिर्फ़ कीचड, केमीकल, और मरी हुई मछलियों के अलावा कुछ भी नही है। जिन लोगो के मन मे इन नदियों के लिये आस्था है इनकी बर्बादी के ज़िम्मेदार भी वही लोग है जो ज़रुरत पडने पर ही इन नदियों की तरफ़ देखते है और फ़िर इन्हे भुल जाते है। न खुद कुछ करते है और ना गलत करने वाले को रोकते है। टोकने पर कहते है की ये तो सरकार की ज़िम्मेदारी है मानता हुं की सरकार की ज़िम्मेदारी है लेकिन इन नदियों का इस्तेमाल कौन करता है? जब हम लोग इस्तेमाल करते है तो हमारी कोई ज़िम्मेदारी नही बनती है? मैं ये नही कह रहा की जाओ और खुद सफ़ाई करो या जो नदी को गंदा कर रहे है उनसे लडों लेकिन कम से कम हम सरकार का ध्यान तो इस तरफ़ दिला सकते है और थोडे - थोडे दिनो बाद उनसे सवाल करते रहें की आप लोग क्या कर रहे है।

और भुजल का तो बहुत बुरा हाल है महोबा, देवास, रेह्ती, मालवा, जैसे बहुत से इलाके है जहां पर भुजल स्तर बहुत नीचे चला गया है कहीं पर ४५० फ़ीट, कहीं ५०० फ़ीट, और तो और कुछ इलाको मे ६५० फ़ीट पर भी पानी नही है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल जो एक बहुत बडा शहर है और काफ़ी खुबसुरत है। भोपाल मे कभी छोटे-बडे १० तालाब और झीले थी अब उनमें से कुछ ही बची है। भुजल स्तर दिन ब दिन नीचे जाता जा रहा है कुछ इलाको मे ६०० फ़ीट पर भी पानी नही है।भोपाल अब कंक्रीट का जंगल बन चुका है ना वहां तालाब बचे है और ना ही पेड इस वजह से बारिश भी बहुत कम हो गयी है। ये तालाब और झीलों, ज़मीन और बारिश से भी पानी आया तो कहां गया इतना पानी? किसने इस्तेमाल किया? किसने बर्बाद किया? कौन है इसका ज़िम्मेदार? किसकी गलती है?


हमारी गलती है हमने पानी को अपनी जागीर समझा, जब हम एक बाल्टी से नहा सकते थे तो हमने शावर और बाथटब का इस्तेमाल किया, हमने शेव करते, बर्श करते वक्त नल को खुला छोडा जबकी उसकी ज़रुरत नही थी। जिनके घर मे पानी आता है या फिर उनके घर मे सम्रसीबिल पम्प या मोटर लगी है वो अपने घर को पाइप से धोते है घर के अलावा सडक को भी धोते है। आप धोयें मै धोने को मना नही कर रहा हुं लेकिन जो काम ३०-४० लीटर पानी से हो सकता है उसके लिये १५० लीटर पानी बहाने का क्या मतलब है।

ज़्यादातर शहरों मे पुरे - पुरे महीने पानी नही आ रहा है लोग पुरी - पुरी रात जाग रहे है पानी के इन्तेज़ार में। जिन शहरो मे पानी नही है वहां नगर निगम के लोग टैंकर से पानी सप्लाई कर रहे है जब ये टैंकर सडक से गुज़रता है तो लोग इसके पीछे भागते है। हमेशा लडाई होती है क्यौंकी हर आदमी पहले पानी भरना चाहता है अब हर टैंकर के साथ एक पुलिसवाला लगाया जाता है लेकिन वो भी लोगो को काबु मे नही रख पाता है।




मध्य प्रदेश मे इन दो - तीन मे अब तक १०-१२ लोग मौत के मुहं मे जा चुके है पानी की लडाइयों में और कई सौ घायल हो चुके है। हालात बहुत खराब है और दिन ब दिन खराब होते जा रहे है। हमारे देश के एक प्रदेश मे जलयुद्ध शुरु हो चुका है और अब देखना ये है की इस जलयुद्ध को हमारे देश और फिर दुनिया मे फैलने मे कितना वक्त लगता है......

शुक्रवार, 26 जून 2009

मुझें कपडों से नही, पहनने के तरीके से शिकायत है।

दो दिन पहले मैनें एक लेख लिखा था ये शालीनता है, अश्लिलता हैं, फ़ैशन हैं, या फ़ुहडपन?

इस मे मैनें महिलाओं के पहनावे की आलोचना की थी तो इस लेख के जवाब मे मुझे काफ़ी कुछ सुनने को मिल गया।

मेरी समझ मे एक बात नही आती की लोग मेरे लेख का गलत मतलब क्यौं निकाल लेतें है? मैं कहना कुछ चाहता हु और वो समझते कुछ और है इससे पहले भी मैनें एक आलेख लिखा था एक विवाद्पस्द मुद्दे पर तब भी यही हुआ। मैं कहता हुं रात है पाठक कहते है की भोर हो गयी है, मैं कहता हुं डोसा है वो कहते है बिरयानी है।




बुधवार, 24 जून 2009

ये शालीनता है, अश्लिलता हैं, फ़ैशन हैं, या फ़ुहडपन?

मैं इस विषय पर काफ़ी दिनो से लिखना चाहता था लेकिन हर बार मसरुफ़ियत की वजह से रह जाता था लेकिन कल एक दिन मे मैनें इस विषय और इससे मिलते जुलते विषय पर पांच लेख पढें। वो लेख इस प्रकार है:-





बुधवार, 10 जून 2009

अपना घर तलाशती चीटिंयां....।

चीटिं का नाम सुनते ही एक काले से छोटे कीडे का अक्स हमारी आखों के सामने बन जाता है जो हमारे हाथ और प्लेट से गिरे हुए खाने के कण को सर पर उठाये इधर - उधर भागता दिख जाता है। इसकी पह्चान सबसे मेहनती कीडे के रूप मे होती है जो कभी भी हार नही मानता है, अगर आप इसके रास्ते मे कोई चीज़ रख दे तो ये अपना रास्ता बदल कर दुसरे रास्ते से निकल जाता है। हर वक्त ये आपकॊ काम करता मिलेगा। ये एक पुरे झुंड मे रह्ते है जिसकी एक रानी होती है और सब चीटियां उसके आदेश के अनुसार काम करती है। सब चिटियों को उन्का काम बाटं दिया जाता है और वो सब उसी लिहाज़ से अपना काम करती है। ये आपकॊ कभी भी परेशान नही करेगी तब तक जब तक इसकॊ आपसे खतरा मह्सुस नही होता और खतरा महसुस होते ही ये आपकॊ काट लेगीं उसके काट्ने के बाद काफ़ी जलन होती है।

पिछ्ले एक महिने से मेरे घर और मेरे पडोस मे सब लोग एक अजीब सी परेशानी पड गये है। हमारे घरॊं मे चीटियों ने हमला बोल दिया है पुरे घर मे चीटियां ही चीटियां है, जहा आप निगाह घुमायेंगे वहां आपकॊं चीटियां नज़र आ जायेगीं कहीं पर भी आपकॊ वो बैठने नही देगीं। बहुत सोचने के बाद मैनें एक निष्कर्ष ये निकाला है की हम इन्सानों से हर जानवर की तरह इन चिटियों का घर भी इन से छिन लिया है, और अब ये अपना घर तलाश रही है।






पहले चुने मिट्टी के घर बनते थे, फिर दौर आया चम्बंल और सिमेन्ट का, यहा तक तो ठीक था चीटियां दीवार के किनारे से सुराख कर के अपना आशियाना बना लेती थी लेकिन आज कल हर जगह, हर घर मे मार्बल और टाईल्स का ईस्तेमाल हो रहा है जिस्से जो एक थोडा बहुत जो उनके लिये आसरा बना था अब वो भी खतम हो गया है। इनकॊ अब जगह नही मिल रही है कि ये कहां अपना घर बसायें और अपने परिवार को पालें। इनको खाना तो बहुत मिल जाता है क्यौंकी आज के दौर का इन्सान खाता कम है और फेंकता ज़्यादा है क्यौंकी ये इंसान की बहुत पुरानी फ़ितरत है की वो कभी भी अपने आप को मिली नेमत का सही इस्तेमाल नही करता है । अरे मैं अपने विषय से भट्क रहा था, हां तो हम चिटियों के बारे मे बात कर रहे थे, इनकॊ खाना तो मिल जाता है लेकिन इनको घर नही मिल रहा है जो चीटियां किसी मैदान या बाग मे रह्ती है उनकॊ तो घर की परेशानी नही है और रही बात खाने की तो बहुत से ऐसे भले मानस है जॊ सुबह टहलते वक्त इन्हे खाना डालते हैं।

अब कही ऐसा न हो की घरेलु चिडिया, गिद्द और दूसरे जानवरॊ की तरह इन्हे भी देखने के लिये हमें शहर के बाहर गांव और जंगल मे जाना पडे। कब तक हम ऐसे आंख बन्द करके प्रक्रति को नुक्सान पहुचांते रहेगें। अगर इसी तरह हम लोग प्रक्रति को नुकसान रहेंगे तो वो दिन दूर नही कि इस दुनिया मे सिर्फ़ तीन चीज़ें बाकी रहेंगी :- इन्सान, मशीन और ये कंक्रिट का जंगल।

मंगलवार, 2 जून 2009

हमें नही चाहियें ऎसा राष्ट्ध्रम और ऎसी देशभक्ती..!!

मैं काफ़ी दिनों से देख रहा हू की इस हिन्दी ब्लोगिंग जगत को कुछ तुच्छ मानसिकता वाले हिन्दी ब्लोग्गर दो हिस्सो मे बाटनें मे लगे हुए हैं। इनके ब्लोग पर आपको हमेशा हिन्दुत्व के सम्बन्ध मे, भाजपा और संघ की तारीफ करती हुई पोस्ट मिलेगीं। मुझे उनके भाजपा या किसी और तारिफ़ करने से कुछ परेशानी नही हैं, परेशानी मुझे इस बात से है कि इनका हर लेख काग्रेंस, इस्लाम और मुस्लिम समुदाय की बुराई से शुरू होता है और सघं, भाजपा, और हिन्दुत्व की तारिफ पे खत्म होता है। इन सब के ब्लोग्स पर Comment Moderation लगा हुआ है, जो टिप्पणी इनको प्रकाशित करनी होती है उसे प्रकाशित करते है वर्ना जो टिप्पणी कुछ ज़्यादा ही इनके खिलाफ होती उसे ये पी जाते है, इनके लेख पढेंगे तो ऐसा लगेगा जैसे की आप भाजपा या सघं के किसी नेता का भाषण सुन रहें है।

मैं काफ़ी दिनॊं से चुप था लेकिन अब बर्दाश्त से बाहर हो गया तो मैने ये लेख लिखा है। इन ब्लोग्गर्स मे से प्रमुख है :- सुरेश चिपलूनकर जी, त्यागी जी, अरुन उर्फ पन्गेबाज़ जी। और इनके ब्लोग पर आपको जो इनकी हौसला अफ़ज़ाई करते मिलेगें उनमे प्रमुख है :- संजय बेंगाणी, ताऊ रामपुरिया, दिनेशराय द्विवेदी, अजित वडनेरकर, संजीव कुमार सिन्‍हा, शिव कुमार मिश्रा, महाशक्ति, ऋषभ कृष्ण, राज भाटिया, आदि। आपको किसी ब्लोग पर हिन्दुत्व की तारिफ करती या इस्लाम और कांग्रेस की बुराई करती कोई पोस्ट मिलेगी तो आपको उस पर इन लोगो की टिप्पणी ज़रूर मिलेगीं।






ये लोग अपने आप को देशभक्त और राष्ट-धर्म का पालन करने वाला बताते है और अगर इनहे सम्प्रदायिक कह दो तो इनको बहुत - बहुत बुरा लगता है। ये दुसरे लोगो यानी कांग्रेस और मुसलमानो को सेकुलर इस अन्दाज़ से कहते है जैसे गाली दे रहे हो, लेकिन मै इन "कथित" देशभक्तो से मै एक सवाल करना चाह्ता हू की देशभक्त कौन होता है? जो एक देश की बात करता है या जो सिर्फ़ एक धर्म या जाति विशेष के लोगो कि बात करता है। यह लोग इतने बेवकुफ तो नही है कि इन्हे पता न हो की ये हिन्दु राष्ट नही है, या की कितने बरसो से कितने धर्मों और सभ्यताओ के मानने वाले लोग हमारे इस देश रह्ते आ रहे हैं।

क्या आप लोग मेरे कुछ सवालो के जवाब देगें?

देशभक्त कौन होता है?

राष्ट-धर्म क्या होता है?

साम्प्रदायिक कौन होता है?

सेकुलर कौन होता है?


चलिये मै ही दे देता हु देशभक्त वो होता है जो हर हाल मे अपने देश और देशवासियों का भला चाह्ता है। हर हाल मे हर मुसीबत से अपने देश को बचाने कि हर सम्भव कोशिश करता है। राष्ट-धर्म भी यही कह्ता है की तुम्हारा राष्ट ही सर्वोपरी है बाकी सब बाद का है लेकिन इन लोगो को तो किसी चीज़ से कोई मतलब नही है।

साम्प्रदायिक उस शख्स या संस्था को कह्ते है जो सिर्फ एक धर्म या जाति की बात करती है चाहे वो कोई भी हो।

सेकुलर वो होता है जो हर जाति और धर्म के लोगो के भले के लिये काम करें।

मैने इन सबकी परिभाषा इसलिये बतायी है क्यौंकि ये जितने ब्लोगगर हैं वो सब ३५ वर्ष से ऊपर के हैं तो मुझे लगा शायद भूल गये हो इसलिये उनको याद करा दिया।

मेरी इन सब लोगो से गुज़ारिश है की महरबानी करके ये सब बन्द कर दें, इस ब्लोगिंग जगत और हमारे देश को दो हिस्सो मे ना बाटें। आज के युवा को सारी बीती बातें भूलकर आगे अपना भविष्य बनाने दें अगर वो इस तरफ लग गया तो फिर कुछ नही कर पायेगा।

इसलिये आज के युवा ने काग्रेंस को वोट किया था क्यौंकी वो विकास की बात कर रहें है राम-मन्दिर की नही।

अगर अब भी आप अपनी विचारधारा को सही मानते है तो फिर हमें ऐसा देशप्रेम और राष्ट-ध्रम नही चाहिये.......!!

रविवार, 31 मई 2009

विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर एक अपील और कुछ ख़ास तस्वीरे !!

विश्व तंबाकू निषेध दिवस, 31 मई पर मै सारे ब्लोग्गर समुदाय की तरफ़ से तम्बाकु का सेवन करने वाले लोगो से एक अपील करता हू की इस धीमे ज़हर का सेवन बन्द कर दे। अपनी, अपने चाहने वालो, अपने आस पास रहने वालो और इस देश का भला करे। मै इस मौके पर कुछ तस्वीरे पेश कर रहा हू ..... इन्हे देखे और सबक ले.... जहा तक मै समझता हु मुझे आप लोगो को बताने कि ज़रुरत नही है कि इस्से क्या - क्या नुक्सान है...

इन तस्वीरो मे नीला रगं जो दिख रहा है वो खून है..ब्लोग्गर की सेटिंग कि वजह से ये नीला दिख रहा है























इन तस्वीरो के अलावा मेरे पास कुछ तस्वीरे और भी है लेकिन उन तस्वीरो को मैने अपने ब्लोग पर लगाना उचित नही समझा। अगर आप लोगो को वो तस्वीरे देखनी है तो यहा चट्का लगायें
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