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रविवार, 3 अगस्त 2008

हर मुसलमान आतंकवादी नही है......

मैंने आज मोहल्ला पर अविनाश जी ने फरीद भाई की पोस्ट के बारे में लिखा है वो बहुत सही लिखा है....हमारे देश में बिल्कुल यही हो रहा है हम लोग आज कल बिलकूल यही कर रहे है......हर मुसलमान को गुनाहगार की तरह देख रहे हैं समझते है की यह भी एक आतंकवादी है......
मैं मानता हूँ की आज तक जितने आतंकवादी पकड़े गए है सब मुसलमान थे लेकिन कभी हमने या किसी भी हिन्दुस्तानी ने यह जानने की कोशिश की है वो वाकई में आतंकवादी था जिस आदमी को पुलिस ने पकड़ कर हमारे सामने पेश किया है वो वाकई में आतंकवादी है या सिर्फ़एक आम आदमी....हमारी पुलिस जिसको सामने खडा कर देती है वो ही मुजरिम हो जाता है चाहे उसको खिलाफ साबुत हो या नही इससे कोई मतलब नही है....किसी भी हिन्दुस्तानी ने उस इंसान का इतिहास जानने की कोशिश की पकडे जाने से पहले वो कया करता था???? नही किसी ने नही की

बंगलोर में 8 बम फटे , १ मौत हुई, ९ घायल हुए,
अहमदाबाद में १९ बम पते, ५४ मौते हुई, ११४ घायल हुए,
सूरत में २० बम बरामद हुए जिसमे से एक भी नही फटा...

बंगलोर और अहेम्दाबाद में कम क्षमता वाले धमाके किए गए.....लेकिन आतंकवादीयो ने ऐसा क्योँ किया यह समझ से बहार है क्यूंकि आतंकवादियों का मकसद तो आतंक फेलाना है जितने ज़यादा लोग मरेंगे उतना आतंक फैलेगा तो उनके दिल में दया कैसे आ गई जो उन्होंने कम ताकत के बम इस्तेमाल करे ??/

यह सब सत्ता की राजनीति है और कुछ नही सत्ता के ठेकेदारों ने हमें अपने हात की कटपुतली बना रखा है और हमें अपने हिसाब से इस्तेमाल करते आ रहे है....

अब वक्त आ गया है की हम लोग हिंदू-मुस्लिम से आगे बढ़ कर सोचे, एक होकर इससे लादे तो उसी में ही हमारी भलाई है....इस हालात पर एक शेर याद आ रहा जो काफी वक्त पहले सुना था....

अभी भी वक्त है जाग जाओ ऐ हिन्दुस्तान वालो
वरना मीट जाओगे तुम्हारी दास्तां भी न होगी, दास्तानों में
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