मैं काफ़ी दिनों से देख रहा हू की इस हिन्दी ब्लोगिंग जगत को कुछ तुच्छ मानसिकता वाले हिन्दी ब्लोग्गर दो हिस्सो मे बाटनें मे लगे हुए हैं। इनके ब्लोग पर आपको हमेशा हिन्दुत्व के सम्बन्ध मे, भाजपा और संघ की तारीफ करती हुई पोस्ट मिलेगीं। मुझे उनके भाजपा या किसी और तारिफ़ करने से कुछ परेशानी नही हैं, परेशानी मुझे इस बात से है कि इनका हर लेख काग्रेंस, इस्लाम और मुस्लिम समुदाय की बुराई से शुरू होता है और सघं, भाजपा, और हिन्दुत्व की तारिफ पे खत्म होता है। इन सब के ब्लोग्स पर Comment Moderation लगा हुआ है, जो टिप्पणी इनको प्रकाशित करनी होती है उसे प्रकाशित करते है वर्ना जो टिप्पणी कुछ ज़्यादा ही इनके खिलाफ होती उसे ये पी जाते है, इनके लेख पढेंगे तो ऐसा लगेगा जैसे की आप भाजपा या सघं के किसी नेता का भाषण सुन रहें है।
मैं काफ़ी दिनॊं से चुप था लेकिन अब बर्दाश्त से बाहर हो गया तो मैने ये लेख लिखा है। इन ब्लोग्गर्स मे से प्रमुख है :- सुरेश चिपलूनकर जी, त्यागी जी, अरुन उर्फ पन्गेबाज़ जी। और इनके ब्लोग पर आपको जो इनकी हौसला अफ़ज़ाई करते मिलेगें उनमे प्रमुख है :- संजय बेंगाणी, ताऊ रामपुरिया, दिनेशराय द्विवेदी, अजित वडनेरकर, संजीव कुमार सिन्हा, शिव कुमार मिश्रा, महाशक्ति, ऋषभ कृष्ण, राज भाटिया, आदि। आपको किसी ब्लोग पर हिन्दुत्व की तारिफ करती या इस्लाम और कांग्रेस की बुराई करती कोई पोस्ट मिलेगी तो आपको उस पर इन लोगो की टिप्पणी ज़रूर मिलेगीं।
ये लोग अपने आप को देशभक्त और राष्ट-धर्म का पालन करने वाला बताते है और अगर इनहे सम्प्रदायिक कह दो तो इनको बहुत - बहुत बुरा लगता है। ये दुसरे लोगो यानी कांग्रेस और मुसलमानो को सेकुलर इस अन्दाज़ से कहते है जैसे गाली दे रहे हो, लेकिन मै इन "कथित" देशभक्तो से मै एक सवाल करना चाह्ता हू की देशभक्त कौन होता है? जो एक देश की बात करता है या जो सिर्फ़ एक धर्म या जाति विशेष के लोगो कि बात करता है। यह लोग इतने बेवकुफ तो नही है कि इन्हे पता न हो की ये हिन्दु राष्ट नही है, या की कितने बरसो से कितने धर्मों और सभ्यताओ के मानने वाले लोग हमारे इस देश रह्ते आ रहे हैं।
क्या आप लोग मेरे कुछ सवालो के जवाब देगें?
देशभक्त कौन होता है?
राष्ट-धर्म क्या होता है?
साम्प्रदायिक कौन होता है?
सेकुलर कौन होता है?
चलिये मै ही दे देता हु देशभक्त वो होता है जो हर हाल मे अपने देश और देशवासियों का भला चाह्ता है। हर हाल मे हर मुसीबत से अपने देश को बचाने कि हर सम्भव कोशिश करता है। राष्ट-धर्म भी यही कह्ता है की तुम्हारा राष्ट ही सर्वोपरी है बाकी सब बाद का है लेकिन इन लोगो को तो किसी चीज़ से कोई मतलब नही है।
साम्प्रदायिक उस शख्स या संस्था को कह्ते है जो सिर्फ एक धर्म या जाति की बात करती है चाहे वो कोई भी हो।
सेकुलर वो होता है जो हर जाति और धर्म के लोगो के भले के लिये काम करें।
मैने इन सबकी परिभाषा इसलिये बतायी है क्यौंकि ये जितने ब्लोगगर हैं वो सब ३५ वर्ष से ऊपर के हैं तो मुझे लगा शायद भूल गये हो इसलिये उनको याद करा दिया।
मेरी इन सब लोगो से गुज़ारिश है की महरबानी करके ये सब बन्द कर दें, इस ब्लोगिंग जगत और हमारे देश को दो हिस्सो मे ना बाटें। आज के युवा को सारी बीती बातें भूलकर आगे अपना भविष्य बनाने दें अगर वो इस तरफ लग गया तो फिर कुछ नही कर पायेगा।
इसलिये आज के युवा ने काग्रेंस को वोट किया था क्यौंकी वो विकास की बात कर रहें है राम-मन्दिर की नही।
अगर अब भी आप अपनी विचारधारा को सही मानते है तो फिर हमें ऐसा देशप्रेम और राष्ट-ध्रम नही चाहिये.......!!
धर्म, जात - पात को एक तरफ़ रख कर हिन्दुस्तान को एक सूत्र के पिरोने की कोशिश....
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मंगलवार, 2 जून 2009
शनिवार, 20 सितंबर 2008
इन्होने तो मुसलमानों को आतंकवादी और देशद्रोही साबित कर दिया !!
"अमिताभ बुधौलिया 'फरोग' जी" ने "भड़ास" और अपने ब्लॉग "गिद्ध" पर एक पोस्ट लिखी थी उसमे उन्होंने जो लिखा मैं उनकी भावनाओ की इज्ज़त करता हूँ लेकिन उन्होंने ना - ना करते करते आपने मुसलमानों को आतंकवादी और देशद्रोही साबित कर दिया, और बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद् की पुरी तरह से वकालत की है,
सिमी पर तो प्रतिबन्ध लगा हुआ है और सिमी ने जितने भी हमले किए उसमे से कोई भी हमला किसी धर्म विशेष पर नही था लेकिन बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद् ने सिर्फ़ एक धर्म के लोगो और उनके धर्म स्थलों को निशाना बनाया है तो उन्हें कैसे धर्म निरपेक्ष कह सकते हो? आप लोग ही बताये उन पर प्रतिबन्ध क्योँ नही लगाया जाए?
इस्लाम क्या किसी धर्म में यह नही बताया गया है की दूसरे धर्म के लोगो को जीने ना दो, उन्हें और उन्हें धर्म स्थलों को तबाह कर दो.... इस्लाम तो अपने मानने वालो को कुरान में आदेश देता है की "दुसरो के माबुदो (उपास्यो) को बुरा ना कहो (सूरा-ए-अलंफाल : आयत-१०८) |' पाक कुरान में खुदा का हुक्म है, "जिसने एक बेकुसूर का कत्ल किया, गोया उसने सारी इंसानियत का कत्ल कर दिया सूरा-ए-अल्मायेदाह : आयत - 108) |' आख़िर यह कौन से जेहादी हैं और इनका कौन सा मज़हब है, जो बेगुनाह लोगो की जान लेने को इन्हे आतुर करता है | दिल्ली बम काण्ड को ले, तो यह बात समझ नही आती की क्या कोई सच्चा मुस्लिम, और वे भी रमजान के पाक महीने में ऐसा जघन्य पाप करेगा | साफ़ है, आतंक्वादियौं का कोई धर्म और ईमान नही होता |
आज मुस्लिम समाज में कुछ लोग ऐसे हैं, जो इस्लाम की मानवतावादी शिक्षाओ से कोसो दूर हैं | ऐसे लोगो की गैर इस्लामी हरकतों से इस्लाम का नाम बदनाम होता होता है | इस्लाम का नाम बदनाम करने वाले आतंकवादी चाहे कश्मीर में हों, अफगानिस्तान में हों, पाकिस्तान में हों, अमेरिका में हों, या इंडोनेशिया में, ये सभी इंसानियत और मज़हब पर बदनुमा दाग हैं | इस्लाम अपने मानने वालो को ये आदेश भी देता है की बुढो, बच्चो और औरतों पर हथियार न उठाओ, किसी भी धर्मस्थल में बैठे हुए राहिबो व सन्यासियों पर हमला न करो | किसी ऐसे आदमी पर हमला न करो और ऐसे आदमी से न लड़ो, जो मुकाबला करने की हालत में न हो | मगर आतंकियों ने कभी इन नसीहतो को नही पढ़ा | सिर्फ़ नाम मुसलमान का और बाप - दादा के मुसलमान होने कोई मुसलमान नही हो जाता हैं,
इस्लाम एक आधुनिक धर्म है और धर्म से अधिक जीवन व्यतीत करने की कला है | इसीलिए एक आम मुस्लिम इन आतंकी हमलो की कभी हिमायत नही करता, मगर यह कुबूलने में कोई गुरेज़ नही की लगातार हो रहे आतंकी विस्फोटो के पीछे के तथाकथीत अक्स ने एक समूचे समुदाय के ऐतबार को चोट पहुचाई है |
इस्लाम को इन जेहादियों ने एक हिंसक रूप में पेश किया है, जबकि इसका नाता तो सूफी फलसफे से जुड़ा है और यह तलवार से नही, बल्कि सुफियान सोच और मोहब्बत से दुनिया भर में फैला है | पाक कुरान में तीसवें पारे (अध्याय) की सुरा-ए-अल्काफिरून में लिखा है, 'लकुम दिनोकुम वली यदिन' अर्थार्त तुम्हे तुम्हारा धर्म मुबारक, हमें हमारा धर्म मुबारक | कुरान में कहीं नही लिखा की दकाज़नी करो, खूरेंजी करो या दूसरो की जान लो | सच्चाई तो यह है की रहमदिली को इस्लाम का जौहर माना गया है |
कुछ लोग सवाल उठा सकते हैं की क्या कुरान के यह संदेश ओसामा बिन लादेन, मुल्ला उमर, मसूद अजहर आदि ने नही पढ़े होंगे? इसके जवाब में यह प्रश्न पुछा जा सकता है की क्या इस्लाम के असली ठेकेदार और मुल्ला यही लोग हैं? एक कहावत है, नीम हकीम खतरा ऐ जान और नीम मुल्ला खतरा ऐ ईमान | जेहाद का नाम लेकर बेगुनाह लोगो की हत्या कर रहे लोग शायद ये नही जानते की जेहाद का अर्थ हज़रात मोहम्मद ने अपने नफ्स (इन्द्रियों) से लड़ना बताया है |
सिमी पर तो प्रतिबन्ध लगा हुआ है और सिमी ने जितने भी हमले किए उसमे से कोई भी हमला किसी धर्म विशेष पर नही था लेकिन बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद् ने सिर्फ़ एक धर्म के लोगो और उनके धर्म स्थलों को निशाना बनाया है तो उन्हें कैसे धर्म निरपेक्ष कह सकते हो? आप लोग ही बताये उन पर प्रतिबन्ध क्योँ नही लगाया जाए?
इस्लाम क्या किसी धर्म में यह नही बताया गया है की दूसरे धर्म के लोगो को जीने ना दो, उन्हें और उन्हें धर्म स्थलों को तबाह कर दो.... इस्लाम तो अपने मानने वालो को कुरान में आदेश देता है की "दुसरो के माबुदो (उपास्यो) को बुरा ना कहो (सूरा-ए-अलंफाल : आयत-१०८) |' पाक कुरान में खुदा का हुक्म है, "जिसने एक बेकुसूर का कत्ल किया, गोया उसने सारी इंसानियत का कत्ल कर दिया सूरा-ए-अल्मायेदाह : आयत - 108) |' आख़िर यह कौन से जेहादी हैं और इनका कौन सा मज़हब है, जो बेगुनाह लोगो की जान लेने को इन्हे आतुर करता है | दिल्ली बम काण्ड को ले, तो यह बात समझ नही आती की क्या कोई सच्चा मुस्लिम, और वे भी रमजान के पाक महीने में ऐसा जघन्य पाप करेगा | साफ़ है, आतंक्वादियौं का कोई धर्म और ईमान नही होता |
आज मुस्लिम समाज में कुछ लोग ऐसे हैं, जो इस्लाम की मानवतावादी शिक्षाओ से कोसो दूर हैं | ऐसे लोगो की गैर इस्लामी हरकतों से इस्लाम का नाम बदनाम होता होता है | इस्लाम का नाम बदनाम करने वाले आतंकवादी चाहे कश्मीर में हों, अफगानिस्तान में हों, पाकिस्तान में हों, अमेरिका में हों, या इंडोनेशिया में, ये सभी इंसानियत और मज़हब पर बदनुमा दाग हैं | इस्लाम अपने मानने वालो को ये आदेश भी देता है की बुढो, बच्चो और औरतों पर हथियार न उठाओ, किसी भी धर्मस्थल में बैठे हुए राहिबो व सन्यासियों पर हमला न करो | किसी ऐसे आदमी पर हमला न करो और ऐसे आदमी से न लड़ो, जो मुकाबला करने की हालत में न हो | मगर आतंकियों ने कभी इन नसीहतो को नही पढ़ा | सिर्फ़ नाम मुसलमान का और बाप - दादा के मुसलमान होने कोई मुसलमान नही हो जाता हैं,
इस्लाम एक आधुनिक धर्म है और धर्म से अधिक जीवन व्यतीत करने की कला है | इसीलिए एक आम मुस्लिम इन आतंकी हमलो की कभी हिमायत नही करता, मगर यह कुबूलने में कोई गुरेज़ नही की लगातार हो रहे आतंकी विस्फोटो के पीछे के तथाकथीत अक्स ने एक समूचे समुदाय के ऐतबार को चोट पहुचाई है |
इस्लाम को इन जेहादियों ने एक हिंसक रूप में पेश किया है, जबकि इसका नाता तो सूफी फलसफे से जुड़ा है और यह तलवार से नही, बल्कि सुफियान सोच और मोहब्बत से दुनिया भर में फैला है | पाक कुरान में तीसवें पारे (अध्याय) की सुरा-ए-अल्काफिरून में लिखा है, 'लकुम दिनोकुम वली यदिन' अर्थार्त तुम्हे तुम्हारा धर्म मुबारक, हमें हमारा धर्म मुबारक | कुरान में कहीं नही लिखा की दकाज़नी करो, खूरेंजी करो या दूसरो की जान लो | सच्चाई तो यह है की रहमदिली को इस्लाम का जौहर माना गया है |
कुछ लोग सवाल उठा सकते हैं की क्या कुरान के यह संदेश ओसामा बिन लादेन, मुल्ला उमर, मसूद अजहर आदि ने नही पढ़े होंगे? इसके जवाब में यह प्रश्न पुछा जा सकता है की क्या इस्लाम के असली ठेकेदार और मुल्ला यही लोग हैं? एक कहावत है, नीम हकीम खतरा ऐ जान और नीम मुल्ला खतरा ऐ ईमान | जेहाद का नाम लेकर बेगुनाह लोगो की हत्या कर रहे लोग शायद ये नही जानते की जेहाद का अर्थ हज़रात मोहम्मद ने अपने नफ्स (इन्द्रियों) से लड़ना बताया है |
मंगलवार, 8 जुलाई 2008
इस्लाम और मुसलमानों के बारे में बहुत ग़लतफ़हमियाँ है....
सबसे पहले आप सभी भाई बंधुओ का तहेदिल से शुक्रिया जिन्होंने मेरी पोस्ट को पढ़ कर अपने विचार प्रकट किए । मैं आप लोगो के विचारों की इज्ज़त करता हूँ ।
मैं आपके सब सवालों का जवाब दूंगा तो सबसे पहले रोहित त्रिपाठी जी के सवाल का जवाब दूंगा उन्होंने पुछा है की जितने आतंकवादी पकड़े गए वो सब मुसलमान क्योँ है?
पहली बात क्या आपको यकीन है की जो लोग पकड़े गए वो असलियत में आतंकवादी थे या बेकुसूर थे? आपने उनके कुसूरवार होने का फ़ैसला कैसे कर दिया? चलिए मैं मानता हूँ की सब गुनाहगार थे तो उन्होंने जो हमले किए उन हमलो में मरने और घायल होने वाले सब लोग हिंदू थे? उसमे कोई मुसलमान नही था? या जिन लोगो का नुक्सान हुआ था उसमे से कोई मुसलमान नही था? और अगर नही था तब भी मैं पूछता हूँ उसमे सारी दुनिया के मुसलमानों का क्या कसूर?
अगर एक घर के पाँच बेटो में एक बेटा गुंडा बन जाए और बाकी सब डॉक्टर, साइंटिस्ट, वगेरह हो तो क्या उस गुंडे के कर्मो की सज़ा कानून सारे बेटो को देगा? नही जिसने जो कर्म किए उसकी सज़ा सिर्फ़ उसे ही मिलनी चाहिए । आतंक्वादियौं का कोई धर्म - ईमान नही होता है ।
संजय शर्मा जी गुप्ता जी और मेरी बात में एक फर्क है जिस वजह से मुझे लिखना पड़ा वो बात थी की उन्होंने सिर्फ़ हिंदू धर्म की बात की थी बाकी और धर्मो की नही मैंने तो बस उनकी बात को थोड़ा सा सही किया है और कुछ उन्होंने कहा की हिंदू धर्म में किसी से नफरत करना नही सिखाया जाता है तो मैंने बता दिया की दुनिया के किसी धर्म में यह नही सिखाया जाता है.....रही बात काफिर के साथ क्या करना चाहिए तो कुरान में है की काफिर को इस्लाम की दावत दो लेकिन सिर्फ़ ज़बान से....उसके साथ कोई ज़बरदस्ती नही करना और ना ही उसको इस्लाम कुबूल करने के लिए मजबूर कीजिये।
राज भाटिया जी आप मेरे बड़े है मैं आपकी बात की इज्ज़त करता हूँ लेकिन मैं आपको बात को सही करना चाहूँगा की काफिर का मतलब नास्तिक नही होता है क्यूंकि नास्तिक किसी भगवान् में यकीन नही करता है। और काफिर का मतलब होता है इनकारी.....जिसने अल्लाह के हुक्म से इनकार किया, मोहम्मद साहब को अल्लाह का संदेशवाहक नही माना, उनकी बात पर यकीन नही किया, उसे काफिर कहते है
सुनील डोगरा जालिम जी मैंने उनकी उम्र पर कोई टिप्पणी नही की थी दरअसल मैंने उनकी उम्र इसलिए बताई थी क्यूंकि इतनी दुनिया देखने के बावजूद उन्होंने इस तरह की टिप्पणी की ।
ab inconvenienti जी यहूदियों ने अल्लाह के संदेशवाहक हजरत उजैर को खुदा का बेटा करार दे दिया इसलिए उनको काफिर कहा जाता है और अल्लाह की कोई औलाद नही है । काफिर के प्रति सच्चे मुसलमान के कर्तव्य यह है की वो उसको इस्लाम की दावत दे मगर सिर्फ़ जुबां से, उसे इस्लाम की खुबियौं के बारे में बताये, उससे नफरत ना करे, उसे किसी भी तरह का नुक्सान पहुचाने की कोशिश भी ना करे, उसके साथ किसी भी तरह की ज़ोर- ज़बरदस्ती ना करे, ना उसको इस्लाम कुबूल करने को मजबूर करे .
अगर किसी भाई के मन में कोई सवाल हो तो वो बेझिझक पूछ सकता है...
तो मेरी आप सब लोगो से गुजारिश है की हिंदू - मुस्लिम के झगडे से दूर रहे और सगे भाइयो की तरह रहे और हाथ से हाथ मिला कर हिन्दुस्तान को नई ऊंचाई पर ले जाए..... जय हिंद
मैं आपके सब सवालों का जवाब दूंगा तो सबसे पहले रोहित त्रिपाठी जी के सवाल का जवाब दूंगा उन्होंने पुछा है की जितने आतंकवादी पकड़े गए वो सब मुसलमान क्योँ है?
पहली बात क्या आपको यकीन है की जो लोग पकड़े गए वो असलियत में आतंकवादी थे या बेकुसूर थे? आपने उनके कुसूरवार होने का फ़ैसला कैसे कर दिया? चलिए मैं मानता हूँ की सब गुनाहगार थे तो उन्होंने जो हमले किए उन हमलो में मरने और घायल होने वाले सब लोग हिंदू थे? उसमे कोई मुसलमान नही था? या जिन लोगो का नुक्सान हुआ था उसमे से कोई मुसलमान नही था? और अगर नही था तब भी मैं पूछता हूँ उसमे सारी दुनिया के मुसलमानों का क्या कसूर?
अगर एक घर के पाँच बेटो में एक बेटा गुंडा बन जाए और बाकी सब डॉक्टर, साइंटिस्ट, वगेरह हो तो क्या उस गुंडे के कर्मो की सज़ा कानून सारे बेटो को देगा? नही जिसने जो कर्म किए उसकी सज़ा सिर्फ़ उसे ही मिलनी चाहिए । आतंक्वादियौं का कोई धर्म - ईमान नही होता है ।
संजय शर्मा जी गुप्ता जी और मेरी बात में एक फर्क है जिस वजह से मुझे लिखना पड़ा वो बात थी की उन्होंने सिर्फ़ हिंदू धर्म की बात की थी बाकी और धर्मो की नही मैंने तो बस उनकी बात को थोड़ा सा सही किया है और कुछ उन्होंने कहा की हिंदू धर्म में किसी से नफरत करना नही सिखाया जाता है तो मैंने बता दिया की दुनिया के किसी धर्म में यह नही सिखाया जाता है.....रही बात काफिर के साथ क्या करना चाहिए तो कुरान में है की काफिर को इस्लाम की दावत दो लेकिन सिर्फ़ ज़बान से....उसके साथ कोई ज़बरदस्ती नही करना और ना ही उसको इस्लाम कुबूल करने के लिए मजबूर कीजिये।
राज भाटिया जी आप मेरे बड़े है मैं आपकी बात की इज्ज़त करता हूँ लेकिन मैं आपको बात को सही करना चाहूँगा की काफिर का मतलब नास्तिक नही होता है क्यूंकि नास्तिक किसी भगवान् में यकीन नही करता है। और काफिर का मतलब होता है इनकारी.....जिसने अल्लाह के हुक्म से इनकार किया, मोहम्मद साहब को अल्लाह का संदेशवाहक नही माना, उनकी बात पर यकीन नही किया, उसे काफिर कहते है
सुनील डोगरा जालिम जी मैंने उनकी उम्र पर कोई टिप्पणी नही की थी दरअसल मैंने उनकी उम्र इसलिए बताई थी क्यूंकि इतनी दुनिया देखने के बावजूद उन्होंने इस तरह की टिप्पणी की ।
ab inconvenienti जी यहूदियों ने अल्लाह के संदेशवाहक हजरत उजैर को खुदा का बेटा करार दे दिया इसलिए उनको काफिर कहा जाता है और अल्लाह की कोई औलाद नही है । काफिर के प्रति सच्चे मुसलमान के कर्तव्य यह है की वो उसको इस्लाम की दावत दे मगर सिर्फ़ जुबां से, उसे इस्लाम की खुबियौं के बारे में बताये, उससे नफरत ना करे, उसे किसी भी तरह का नुक्सान पहुचाने की कोशिश भी ना करे, उसके साथ किसी भी तरह की ज़ोर- ज़बरदस्ती ना करे, ना उसको इस्लाम कुबूल करने को मजबूर करे .
अगर किसी भाई के मन में कोई सवाल हो तो वो बेझिझक पूछ सकता है...
तो मेरी आप सब लोगो से गुजारिश है की हिंदू - मुस्लिम के झगडे से दूर रहे और सगे भाइयो की तरह रहे और हाथ से हाथ मिला कर हिन्दुस्तान को नई ऊंचाई पर ले जाए..... जय हिंद
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