मेरी ज़िन्दगी का मकसद "दो वक्त की रोटी"...... ये अलफ़ाज़ एक सात-आठ साल के बच्चे ने मुझसे कहे। कल मैं अपने भतीजे को स्कुल से ला रहा था तो सिग्नल एक सात-आठ साल का बच्चा मुझे भीख मागंने लगा ये सब पहले आगरा में नही होता था लेकिन पिछ्ले छ्ह-सात महीनों से यहां पर भी शुरु हो गया है। आमतौर पर मैं बच्चों, हट्टे-कट्टे और सही जिस्म वाले भिखारियों को भीख नही देता हूं...क्यौकि ये लोग मजबुर नही होते है ये भीख का कारोबार करते है और मैं उस लडके को काफ़ी वक्त से इस चौराहे पर देख रहा हूं वो मुझे रोज़ मिलता है लेकिन कल पहली बार उसने मुझसे भीख मांगी थी।
मैने उसको मना कर दिया वो जाने लगा तो मेरे भतीजे उसे बुलाया "तुम्हारा नाम क्या है?" उसने जवाब दिया "मोनू"... "कहां रहते हो?" उसने कहा "यहीं सडक पर"...."तुम्हारे मम्मी-पापा कहां है?" मेरे भतीजे ने उससे पुछा तो उसकी समझ में नही आया तो उसने दोबारा पुछा "तुम्हारे मां-बाप कहां है?" मेरे भतीजे और उसकी उम्र लगभग एक जैसी होगी....मैं अपने भतीजे का चेहरा देख रहा था कि ये छोटा बच्चा उससे कैसा सवाल कर रहा है.....उस लडके ने जवाब दिया :- "मां का पता नही बापू तो वहां शराब की दुकान पर बैठा है"
धर्म, जात - पात को एक तरफ़ रख कर हिन्दुस्तान को एक सूत्र के पिरोने की कोशिश....
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गुरुवार, 17 सितंबर 2009
मेरी जिन्दगी का मकसद दो वक्त की रोटी.... My life ambition two times food in a day
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रविवार, 5 जुलाई 2009
हरियाली के लिये दौड (GO GREEN RUN) आगरा में
होटल जे. पी. पैलेस मे बना स्टेजआज आगरा मे "The Instituite of Chartered Accountants Of India" ने अपनी डायमंड जुबली के अफ़सर पर "GO GREEN RUN" का आयोजन किया था जो सुबह ६ बजे होट्ल जे. पी. पैलेस से चलकर शिल्पग्राम मे पुरी होनी थी।
मैं भी गया था मेरे बायें घुट्ने मे चोट है तो डाक्टर ने अब सुबह की सैर बतायी है तो मैने सोचा इस्से अच्छा मौका तो हो ही नही सकता तो हम भी पहुच गये लंगडाते हुए। इस रन का मकसद लोगो को जागरुक बनाने का था "ग्लोबल वार्मिगं" के लिये।
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