गुरुवार, 28 मई 2009

जनरल बोगी का नज़ारा....!

मैं आज सुबह लखनऊ - कानपूर से वापस आया हूँ, वहां काम के सिलसिले मे अक्सर जाना होता है । मैं मंगलवार की रात को आगरा से मथुरा - पटना एक्सप्रेस से चला था अचानक जाना पड़ा इसीलिए रिज़र्वेशन नही था तो जनरल बोगी मे सफर किया । जनरल बोगी की हालत बहुत ख़राब है उसमे बैठने के लिए ९० सीट होती हैं, ऊपर की तरफ़ एक बर्थ होती है जिस पर लोग सो जाते हैं या फिर अपना सामान रख लेते है जब भीड़ ज्यादा होती है तो वहां पर लोग बैठ जाते है, आमतौर पर लेटने की जगह नही मिलती है बैठकर ही जाना पड़ता है । परसों भीड़ कुछ कम थी इसलिए चार लोगो की एक सीट पर छह लोग बैठे थे, ऊपर की बर्थ पर तीन लोग बैठे थे, और बाकी जो बचे थे वो सब ज़मीन पर लेट गए ।


मैं ऊपर की बर्थ पर बैठा था तो मैंने वहां से कुछ तस्वीरे और एक विडियो बनाई है जिसे आप यहाँ पर देख सकते है ।






video

कोई ऊपर की बर्थ पर टेड़ा बैठा है, कोई सीट से लटक कर बैठा है बहुत ही अजीब और बुरे हाल मे लोग जनरल बोगी मे सफर कर रहे हैं, ९० सीट और ८ बर्थ की बोगी मे ४०० से ५०० लोग सफर करते हैं, यह गाड़ी तो लखनऊ और पटना जा रही थी इसलिए इसमे भीड़ कम थी आप ज़रा पंजाब, बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात के शहरों जैसे ; मुंबई, पुणे, लुधियाना, अमृतसर, हावडा, कोलकाता, अहमदाबाद, आदि शहरों मे जाने वाली ट्रेनों की हालत देखिये ; बैठने की तो क्या खड़े होने की जगह नही होती है लोग दरवाज़े के ऊपर गमछा बाँध कर बैठे मिल जायेंगे लोग दरवाज़े, पायदान और शौचालय मे बैठकर सफर करते हैं ।

और इन बोगियौं के शौचाल्यौं के क्या कहने ; किसी मे नल नही है, तो किसी मे दरवाजा ही नही है और जनरल बोगी के अन्दर आपको एक चीज़ कभी नही मिलेगी और वो है "पानी"। पता नही की इन डिब्बो मे पानी भरते भी है या नही जिस गाड़ी मे मैंने सफर किया था वो मथुरा से चली थी और मैं आगरा कैंट से इसमे बैठा हूँ और इसके अन्दर पानी नही था ऐसा तो हो ही नही सकता की इन्होने उसमे पानी भरा हो और वो मथुरा से आगरा तक आने मे ख़त्म हो गया हो॥

हर जनरल ट्रेन और जनरल बोगी की यही हालत है, कभी भी आपको उसमे सफाई नही मिलेगी, दो पंखो मे से एक मौजूद होगा, अगर दो होंगे तो एक चलेगा, उसका बटन नही होगा, आप बहुत नसीब वाले होंगे अगर आपको दो पंखें मिले और दोनों चालू हालत मे हो, सबसे बड़ी कमी है रखरखाव की, अच्छी तरह से खयाल नही रखा जाता है किसी भी चीज़ का, यह हमारे देश की सबसे बड़ी कमी है ।

कुछ कमियाँ हमारी भी हैं इन चीजों का इस्तेमाल हम करते है लेकिन इस्तेमाल करते वक्त हम यह भूल जाते हैं की यह हमारी मेहनत की कमाई के एक हिस्से से बनाई गई चीज़ है, अगर ख्याल हम अपने दिल मे पैदा कर ले और इन चीजों को अपनी चीजों की तरह इस्तेमाल करें तो शायद यह चीज़ें इतनी जल्दी ख़राब न हो ।

5 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा जनाब, ऐसा ही होता है जनरल बोगी का नज़ारा. मैं भी जब अपने गाँव जाता हूँ तो नैनीताल एक्सप्रेस में ऐसा ही कुछ नज़ारा होता है. चित्रों का संग्रह आपकी रोचकता को दर्शाता है. अच्छा लेख

    काशिफ भाई आप अपना नंबर दे दें, अगर यह संभव न हो सके तो प्लीज़ मुझे कॉल करें 9838659380 पर,

    आपका सलीम

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  2. आपका मोबाइल मोटोरोला का है, ठीक ठाक है!

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  3. es desh ka eswar hi malik hai. aam admi jindagi jita nahi dhota hai aur dhotay dhotay mar jata hai.
    sunita.

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  4. ये हालात हमारे देश की हर रेलगाडी के हर जनरल डिब्बे के होते है....

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काशिफ आरिफ

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