मंगलवार, 8 जुलाई 2008

इस्लाम और मुसलमानों के बारे में बहुत ग़लतफ़हमियाँ है....

सबसे पहले आप सभी भाई बंधुओ का तहेदिल से शुक्रिया जिन्होंने मेरी पोस्ट को पढ़ कर अपने विचार प्रकट किए । मैं आप लोगो के विचारों की इज्ज़त करता हूँ ।

मैं आपके सब सवालों का जवाब दूंगा तो सबसे पहले रोहित त्रिपाठी जी के सवाल का जवाब दूंगा उन्होंने पुछा है की जितने आतंकवादी पकड़े गए वो सब मुसलमान क्योँ है?

पहली बात क्या आपको यकीन है की जो लोग पकड़े गए वो असलियत में आतंकवादी थे या बेकुसूर थे? आपने उनके कुसूरवार होने का फ़ैसला कैसे कर दिया? चलिए मैं मानता हूँ की सब गुनाहगार थे तो उन्होंने जो हमले किए उन हमलो में मरने और घायल होने वाले सब लोग हिंदू थे? उसमे कोई मुसलमान नही था? या जिन लोगो का नुक्सान हुआ था उसमे से कोई मुसलमान नही था? और अगर नही था तब भी मैं पूछता हूँ उसमे सारी दुनिया के मुसलमानों का क्या कसूर?
अगर एक घर के पाँच बेटो में एक बेटा गुंडा बन जाए और बाकी सब डॉक्टर, साइंटिस्ट, वगेरह हो तो क्या उस गुंडे के कर्मो की सज़ा कानून सारे बेटो को देगा? नही जिसने जो कर्म किए उसकी सज़ा सिर्फ़ उसे ही मिलनी चाहिए । आतंक्वादियौं का कोई धर्म - ईमान नही होता है ।

संजय शर्मा जी गुप्ता जी और मेरी बात में एक फर्क है जिस वजह से मुझे लिखना पड़ा वो बात थी की उन्होंने सिर्फ़ हिंदू धर्म की बात की थी बाकी और धर्मो की नही मैंने तो बस उनकी बात को थोड़ा सा सही किया है और कुछ उन्होंने कहा की हिंदू धर्म में किसी से नफरत करना नही सिखाया जाता है तो मैंने बता दिया की दुनिया के किसी धर्म में यह नही सिखाया जाता है.....रही बात काफिर के साथ क्या करना चाहिए तो कुरान में है की काफिर को इस्लाम की दावत दो लेकिन सिर्फ़ ज़बान से....उसके साथ कोई ज़बरदस्ती नही करना और ना ही उसको इस्लाम कुबूल करने के लिए मजबूर कीजिये।

राज भाटिया जी आप मेरे बड़े है मैं आपकी बात की इज्ज़त करता हूँ लेकिन मैं आपको बात को सही करना चाहूँगा की काफिर का मतलब नास्तिक नही होता है क्यूंकि नास्तिक किसी भगवान् में यकीन नही करता है। और काफिर का मतलब होता है इनकारी.....जिसने अल्लाह के हुक्म से इनकार किया, मोहम्मद साहब को अल्लाह का संदेशवाहक नही माना, उनकी बात पर यकीन नही किया, उसे काफिर कहते है

सुनील डोगरा जालिम जी मैंने उनकी उम्र पर कोई टिप्पणी नही की थी दरअसल मैंने उनकी उम्र इसलिए बताई थी क्यूंकि इतनी दुनिया देखने के बावजूद उन्होंने इस तरह की टिप्पणी की ।

ab inconvenienti जी यहूदियों ने अल्लाह के संदेशवाहक हजरत उजैर को खुदा का बेटा करार दे दिया इसलिए उनको काफिर कहा जाता है और अल्लाह की कोई औलाद नही है । काफिर के प्रति सच्चे मुसलमान के कर्तव्य यह है की वो उसको इस्लाम की दावत दे मगर सिर्फ़ जुबां से, उसे इस्लाम की खुबियौं के बारे में बताये, उससे नफरत ना करे, उसे किसी भी तरह का नुक्सान पहुचाने की कोशिश भी ना करे, उसके साथ किसी भी तरह की ज़ोर- ज़बरदस्ती ना करे, ना उसको इस्लाम कुबूल करने को मजबूर करे .

अगर किसी भाई के मन में कोई सवाल हो तो वो बेझिझक पूछ सकता है...
तो मेरी आप सब लोगो से गुजारिश है की हिंदू - मुस्लिम के झगडे से दूर रहे और सगे भाइयो की तरह रहे और हाथ से हाथ मिला कर हिन्दुस्तान को नई ऊंचाई पर ले जाए..... जय हिंद

7 टिप्‍पणियां:

  1. प्रिये पाठको से गुजारिश है की इस पोस्ट को पढने के बाद अपनी टिप्पणी ज़रूर दे

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  2. यहूदी क्यों काफिर माने जाते हैं, इसका उत्तर आपने दे दिया? ठीक, पर हजरतबल में मुहम्मद साहब के अवशेषों के सामने सजदा करना क्या कुफ्र नहीं है? क्या हजरतबल में कदम रखने वाला हर मुसलमान काफिर कहलाने योग्य नहीं है?

    ज़ैदी साहब का उत्तर, सैद्धांतिक है, अगर विश्वास न हो तो अकादमिक दुनिया से बहार निकल कर, ज़रा उनसे पूछिए जिनके पास आज इस्लाम का नेतृत्व है (मदरसे के मौलाना, हर छोटी बड़ी मस्जिद के मौलवी, काज़ी, और अधिकतर उलेमा) . पूछिए उनसे कि हिंदू काफिर हैं या नही और हिन्दुओं को औपचारिक रूप से 'काफिरों' की श्रेणी से निकाल कर 'मशरीक' का दर्जा देने के लिए कार्यवाही भारत का इस्लामिक जगत कब से शुरू करने जा रहा है? हमारा सामना रोज़मर्रा कि जिंदगी में किताबी लोगों से नहीं होता. औसत और आम मुसलमान ही हमारे सामने पड़ता है.

    और मेरे ये प्रश्न अभी भी अनुत्तरित हैं :

    *और यह क्यों कह रहे हैं की हिंदू खुदा से इंकार करता है? (अगर खुदा का अर्थ निराकार ईश्वर है तो, सिर्फ़ इस्लामिक अवधारणा ही सही है इससे ज़रूर इंकार करता है ). हिंदू भी तो निराकार ईश्वर को ही मानते हैं जिसके रूप ब्रह्म, विष्णु, महेश की त्रिमूर्ति है, दिव्य शक्तियों के प्रतीक सभी देवी-देवता हैं, सनातन धर्म में यह दर्जा किसी मनुष्य को भी मिल सकता है . नास्तिक तो हिंदू भी नहीं हैं, मूर्तीपूजक और प्राकृतिपूजक अवश्य हैं.)

    * हिंदू खुदा से इंकार नहीं करता, पर यह बात उसे समझ नहीं आती की मुस्लिम क्यों दावा करते हैं की हमारा खुदा ही पूजनीय है और तुम जिन बुतों की इबादत करते हो वे इबलीस के प्रतीक हैं?

    * हिन्दुओं को क्या करना होगा जिससे की वे 'काफिर' के वर्गीकरण से बहार आ सकें?

    आख़िर में, अगर कोई कुरान और हदीस की कसौटी के अनुसार काफिर साबित हो जाता है, तो उस काफिर के प्रति एक सच्चे मुसलमान के क्या कर्तव्य हैं? उसके साथ कैसा सुलूक होना चाहिए और क्यों?

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  3. मेरे सवाल का जवाब शायद सिर्फ़ आपने अपने मन से 'पोलिटिकली करेक्ट' होने के लिए दिया है, इसमें कुरान और हदीस को 'कोट' नहीं किया गया है. ये विचार आपके अपने हैं.
    कुरान के--------------- काफिरों के साथ कैंसा व्यव्हार करना चाहिए ---------इसके बारे में अधिक जानकारी आप नीचे दी गई लिंक्स पर पा सकते हैं :
    www.vexen.co.uk/
    www.faithfreedom.org/

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  4. आपने सही कहा, ये गलतफहमियाँ दूर किया जाना जरूरी है। आपने यह काम अपने जिम्मे लिया है, देखकर खुशी हुई।

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  5. Dekhiye Mai aapse bahut chota hu.. aur is sitni badi bahas mein aapse jeet to katai nahi sakta hu.. Maine kabhi nahi kaha ki Sabhi musalmaan Aatankwadi hote hai. maine bas aapse yeh pucha ki Jitne bhi jagah blast ya dhamake hote hai ya jitne bhi aatankwadi hote hai woh musalman kyon hote hai?

    aapne kaha ki aapko kaise pata ki woh aatankwadi hi hai? ho sakta hai un pakde gaye 100 musalmano mein se 10 aatankwadi na ho lekin baki 90?

    aur dusri baat puchana chahuga ki islam itna kattarwadi kyon hai?



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    मेरी पहली कविता...... अधूरा प्रयास

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काशिफ आरिफ

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