रविवार, 5 अप्रैल 2009

हमें शिकायत करने का हक नहीं है...!!! भाग - १

लोकसभा के चुनाव आ रहे हैं, आचार संहिता लागु हो गई है...हर पार्टी अपने - अपने प्रत्याशी खड़े कर रही है जिनको टिकट मिल गया है या मिलने वाला है उन्होंने लोगो के पास चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं वोटो के लिए । लेकिन जब भी चुनाव आते हैं हमारे पास शिकायतों के भण्डार निकल आते हैं की यह नहीं किया, वो नही किया, जो किया था तो वो बेकार हो गया, उसका रखरखाव नही किया.......हमें यह सब शिकयेते करने का हक नहीं है क्यूंकि इन सब चीजों के जिम्मेदार हम लोग हैं और कोई नहीं हैं

कभी अपने आप से पुछा हैं की तुम कितने नियमो का पालन करते हो? तुमने अपने अलावा कभी किसी के बारे मे सोचा है? हम हमेशा नियम तोड़त हैं, कानून को तोड़ते हैं और सरकार पर इल्जाम लगाते है की उन्होंने क़ानून की कमर तोड़ दी है जबकि ऐसा कुछ नहीं हैं ।

हम मे से कितने लोग हैं जो सड़क पर चलते वक्त सारे कानूनों का पालन करता है, बगैर हेलमेट, बगैर लाईसेन्स, तीन सवारी बैठा कर चलते हैं जब पुलिस वाला रोकता है तो उसको पचास रूपये दे कर निकल जाते है,लाल बत्ती को क्रॉस करने में हमें बहुत मज़ा आता है,जहाँ चाहे गाड़ी खड़ी कर देते हैं खासकर "नो पार्किंग" के बोर्ड के सामने, कोई कुछ कहता है तो उससे अकड़ते है हमेशा यही कोशिश रहती है सत्ताधारी पार्टी का झंडा हमारी गाड़ी पर लगा हो । अब इतने नियम तोड़ने के बाद हमें यातायात व्यवस्था ख़राब है यह कहने का हक नहीं हैं।


सड़क पर चलते हुए हमें चिप्स, सुपारी, कोल्ड ड्रिंक का शौक हैं लेकिन हम कूडेदान का इस्तेमाल से परहेज़ करते हैं, क्यूंकि वहां बेक्टीरिया होते हैं जिससे हमें बीमारी लग सकती हैं इसीलिए हम जहाँ खड़े बाकी खूबियाँ वहीं कूडे को फ़ेंक देते हैं, और जब गुटखा, पान खायेंगे तो ज़ाहिर सी बात हैं की पीक तो हम थूकेंगे ही यह तो हमारा हक है हमारा देश आजाद है लेकिन पीकदान के इस्तेमाल से हम परहेज़ करते है क्यूंकि दीवारों को रंगने का मज़ा ही कुछ और है.....अपनी निशानियाँ छोड़ने में मज़ा आता है... शौचालय का इस्तेमाल करें में इतना मज़ा नहीं आता है जितना दीवार पर डिजाईन बनाने में आता है और वैसे भी इतना वक़्त किसके पास है की हम शौचालय ढूंढे जहाँ लगी वहीँ कोई कोना पकड़ कर खड़े हो गए और अगर शौचालय का इस्तेमाल करते भी है तो सार्वजानिक शौचालयौं को हम इस तरह इस्तेमाल करते हैं की हमारे बाद उसको कोई इस्तेमाल नहीं करेगा गंदगी करने में सबसे आगे होते है, अब इतना सब करने के बाद हमें साफ़ - सफाई की शिकायत करने का हक नहीं है ।

बसों, ट्रेनों, सार्वजानिक स्थानों पर धुर्मपान करना मना है लेकिन क्या करें यार बड़ी तलब लगती हैं, और दुसरे लोगो को परेशानी होती है तो हो । बूढे, बच्चे, औरते बैठी हों तो हमें क्या उनको धुंए से परेशानी होती है तो हम क्या करें, वो बीमार होते हैं तो हम क्या करें, हमें तो अपना नशा करना है वो हम करेंगे क्यों न करें हम आजाद भारत के आजाद नागरिक हैं .

बाकी खूबियाँ में आपको अगली पोस्ट में बताऊंगा

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सही कहा आपने.. अगली पोस्ट का इंतजार है..

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  2. काशिफ जी हमारा हिन्दुस्तान को हिन्दुस्तान का दर्द पर जोड़ दिया गया है
    शुक्रिया
    संजय सेन सागर
    जय हिन्दुस्तान-जय यंगिस्तान

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काशिफ आरिफ

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