बुधवार, 11 जून 2008

कुदरत का कहर

भूगर्भ जल दिवस पर कानपूर डिस्ट्रिक्ट मे एक दिल दहलाने वाली घटना हुई । कानपूर जिले के हमीरपुर मे २४ घंटे के अन्दर ५ जगह ज़मीन फट गई । कहीं पर इस की चौडाई ढाई फीट थी कहीं पर इससे कम । तीन सौ मीटर तक लम्बी ज़मीन फटी है और उसकी गहराई २२ फीट से भी ज़्यादा थी ।



ये सब हम लोगो ने ही किया है इसके पीछे सब इंसानों का किया धरा है जब हम ज़मीन में पानी जाने की जगह नही छोडेंगे और ऊपर उसका अन्दर से सब पानी नीचोड़ कर निकाल लेंगे तो क्या होगा । हमने अपने घर के चारो तरफ़ पक्का चबूतरा बना दिया है । अपने आँगन मे हमने बहुत अच्छा सा मार्बल लगाया है, आस पास का सब एरिया हमने कवर कर लिया है, हमने कसम खाई है की कुछ भी हो जाए लेकिन हम बारिश के इस गंदे पानी को हम अपनी ज़मीन के अन्दर नही जाने देंगे ऐसे कैसे कोई हमारी ज़मीन ख़राब कर सकता है,

हम हमेशा ब्रुश करते वक्त नल को फुल रफ़्तार से खोलेंगे, हमेशा शावर से स्नान करेंगे, उसमे से खूब पानी बहायेंगे, देर तक अच्छी तरह मल मल कर स्नान करेंगे, अपना घर जब भी धोयेंगे तो हमेशा पाइप के तेज़ रफ़्तार पानी से धोयेंगे। हम इस ज़मीन के सारे पेड़ काट कर यहाँ बड़े बड़े पक्के मकान और इमारते बनायेंगे।



हम यहाँ पैदा हुए है और इस ज़मीन की हर चीज़ पर हमारा हक़ है हम जो चाहे करे, इसके लिए हमे किसी जो जवाब देने की ज़रूरत नही है और इसी तरह एक दिन हम इस ज़मीन को खोकला कर देगे।



ये कसम हम किसी हाल मे टूटने नही देगे और एक दिन जब ज़मीन मे पानी खत्म हो जायेगा तो हम इंसानों का खून पियेंगे।

3 टिप्‍पणियां:

  1. मोहल्ला मे स्वागत है। आपने बढ़िया मुद्दा उठाया है। हमें मिलकर इसपर विचार करना चाहिए।

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  2. भाई, बहुत ही सामयिक बिषय उठाया है आपने. मेरा गृह नगर धरती फटने वाले स्थान से मात्र 25 KM की दूरी पर है. कभी वहां आके देखिये सूखे ने क्या हालत की हुई है. कितना किसान कौडियों के दाम पर अपनी जमीन बेच कर मजदूरी करने दिल्ली जा रहा है की कम से कम जीविका तो चले.
    एक छोटा सा संसोधन है. जो वाकई फर्क नही डालता है. हमीरपुर ख़ुद एक जिला है. कानपूर से ८० KM दूर.

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  3. हाँ सही है। हम अगली पीढ़ी के लिए कुछ भी नहीं छोड़ेंगे। हम सर्वभक्षी हैं। सबको खा जाएँगें। पृथ्वी, जल और आकाश।
    घुघूती बासूती

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काशिफ आरिफ

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