गुरुवार, 7 जनवरी 2010

बाबरी मस्ज़िद/राम मंदिर मुद्दे का हल... Ram Mandir/Babri Mosque Controversy


        प लोगों ने मेरी बाबरी विध्वंस की सीरीज़ पढी आज मैं उस सीरीज़ का आखिरी लेख पेश कर रहा हूं। इस लेख में हम बाबरी मस्ज़िद/राम मन्दिर मुद्दे के संभावित हलों के बारे में बात करेंगे। इस विषय पर मैनें बहुत से आम आदमीयों से बात की, मैनें जानना चाहा की आम आदमी क्या चाहता हैं। यही एक वजह थी की मैं इतने दिन के अन्तराल के बाद ये लेख लिख रहा हूं। इस बातचीत में हर वर्ग, धर्म, उम्र और जाति के लोग शामिल थे।



इस बातचीत या इसे आप एक छोटा सा सर्वे कह सकते है। ये सर्वे मैनें यु.पी. के कुछ शहरों जैसे आगरा, कानपुर, लखनऊ, बरेली, सहारनपुर, रामपुर, मुरादाबाद, मेरठ आदि में किया था। इस सर्वे में एक बात बिल्कुल आईने की तरह साफ़ हो गयी वो ये की आज की भागदौड भरी ज़िन्दगी में किसी आम आदमी को इस बात की कोई फ़िक्र नही है की वहां मन्दिर बनता है या मस्जिद...! उसे फ़िक्र है तो अपनी रोज़ी-रोटी, अपने बच्चों, अपने परिवार की......


अब बात करते हैं संभावित हलों की....

हल नंबर 1.

ये बात तो अब हर हिन्दुस्तानी को पता है की वहां ना अब मन्दिर बन सकता है और ना मस्ज़िद। तो इस विवाद को खत्म करने के लिये मेरा तथा मेरे सर्वे के अनुसार पहला हल है की उस 2.77 एकड ज़मीन को बराबर के दो हिस्सों में बाटं दिया जाये तथा एक हिस्से में मस्ज़िद और एक हिस्से में राम मन्दिर बना दिया जाये। ज़मीन को इस तरह से बांटा जाये की ठीक बीच से दो हिस्से किये जायें ताकि ना हिन्दु कुछ एतराज़ कर सके और ना मुस्लमान कुछ एतराज़ कर सकें।

यहां विवाद राम मन्दिर के गर्भग्रह को लेकर हो सकता है और यही हिस्सा मस्ज़िद का मुख्य भाग था तो फ़िर उस ज़मीन के दो हिस्से इस प्रकार से किये जायें की दोनों हिस्सों में गर्भग्रह का बराबर भाग मिलें।

हल नंबर 2.

सर्वे में ये हल दुसरे नंबर पर आया है वो ये की उस 2.77 एकड ज़मीन पर एक खुबसुरत सा पार्क बना दिया जाये तथा उसे निशुल्क रखा जाये। सार्वजनिक तौर सब लोग हिन्दु-मुस्लिम तथा सभी धर्म के लोग उसे इस्तेमाल करें।

ये हल ज़ाती तौर पर मुझे पसंद है क्यौंकि पहले हल में एक बार को विवाद पैदा होने के आसार है लेकिन इसमें नही है। इस हल में सिर्फ़ एक जगह विवाद हो सकता है उस पार्क के नाम के ऊपर। उसका हल ये है कि उस पार्क का नाम ना तो जन्मभुमि पार्क, भगवान राम पार्क, बाबरी मस्ज़िद पार्क, किसी नेता या अभिनेता, या महापुरुष के नाम पर रखने के बजाय फ़ैज़ाबाद के किसी शहीद सिपाही के नाम पर रखा जाये।

हल नंबर 3.

ज़ाती तौर पर मैं इस हल से सहमत नही हूं लेकिन इसके बारे में लोगों ने सुझाव दिया था इसलिये मैं इसको सबके सामने रख रहा हूं। 2.77 एकड ज़मीन पर कोई शापिंग काम्पलेक्स या शापिंग माल बनाना। मैं इससे सहमत इसलिये नही हूं क्यौंकि जब इस काम का टेण्डर निकाला जायेगा तो प्राइवेट कम्पनी वाले आगे के फ़ायदे को देखते हुये इस टेण्डर को हथियाने मे लग जायेंगे तो इस तरह सरकारी अफ़सरों की लाटरी निकल जायेगी।

जब उस शापिंग काम्पलेक्स का काम शुरु होगा तो कम्पनी वाले लोगों की भावनाओं का फ़ायदा उठायेगें तथा उन दुकानों की अनाप शनाप कीमत वसुलेंगे।

आप लोग क्या सोचते हैं इसके बारे में????

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7 टिप्‍पणियां:

  1. in my view , this is absurd , and total political , to divide people , so leave this issues and move towards bigger issues how Muslims can improve their standard of life which is worrisome , Muslim leader should concentrate on education of Muslim children so they can have better understanding of life and have better standard of life .

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  2. जब तक मुस्लिम धर्मान्धता से बाहर नहीं आ जाते इस मुद्दे को लटकते रहने देना चाहिए.

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  3. आपने बहुत अच्‍छा हल पेश किया है जिससे ना हिन्दु कुछ एतराज़ कर सके और ना मुस्लमान कुछ एतराज़ कर सकें।

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  4. हल तो अच्छा है मगर सवाल वही है की संजय और सुरेश चिपकू जैसे लोगो की तो दुकान बंद हो जाएगी, फिर इनकी घटिया सोच के बारे मैं कोन सोचेगा, बड़ा बनने का शोक़् तो है मगर बड़प्पन ना हो तो क्या कर सकते हैं? फिर भी अपना पैग़ाम मुहब्बत है जहाँ तक पोहचे..........

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  5. प्रिय मित्र,
    आप अपने आप को हिंदुस्तानी कहते हैं और सौ करोड हिंदुस्तानिओं का दिल दुखाने वाली बात करते हैं? जैसा कि आप जानते हैं, सबकी एक ही जन्मभूमि होती है, श्री राम की भी एक ही जन्मभूमि है, और उनके तमाम भक्त मानते हैं कि वह अयोध्या में उसी जगह पर है जिसे तुष्टिकरण करने वाले नेताओं ने "विवादास्पद" बना रखा है. ऐसे में, वहां पार्क या अस्पताल या कुछ और बन जाने से भले ही कोई और खुश हो जाए पर वास्तविक हिंदू कभी खुश नहीं होगा. मेरी नज़र में आपके द्वारा दिए गए सभी हल निहायत ही बचकाने हैं. दरअसल, यह सारा विवाद ही बेवकूफ़ी भरा है, जिसमें कुछ लोगॊं की ज़िद का प्रतीक बने एक "ढांचे" की तुलना दुनिया भर के अरबों हिंदुओं की आस्था के प्रतीक राम जन्मभूमि से की जाती है. वास्तव में, यही असली "षड्यंत्र" है, "साज़िश" है, "शरारत" है.

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  6. मेरा विचार है कि उस जगह टाटा स्मारक कैंसर अस्पताल जैसा कोई नेत्र, हृदय या कैंसर चिकित्सालय खोल देना चाहिए जिसमें सभी धर्मों के लोग आकर इलाज करवा सकें.

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काशिफ आरिफ

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