(वैधानिक चेतावनी – इन दोनों उदाहरणों में पात्र व घटनायें वास्तविक हैं, इनका जीवित व्यक्तियों से सम्बन्ध है, हिन्दी ब्लॉग जगत से तो बिलकुल है…)
दुसरों को गरियाओं और मशहुर हो जाओं..!!! आज के दौर का सबसे ज़्यादा पसंद किया जाने वाला तरीका....या ये कहें की हर दौर का मशहुर होने का सबसे आसान तरीका.....
विवादित बयान से पहले किसी को वरूण गांधी का नाम मालुम था??
विवादित टिप्पणी से पहले कोई रीता बहुगुंणा को जानता था????...... इस बात पर एक शायर की कही एक लाईन याद आ रही है...
धर्म, जात - पात को एक तरफ़ रख कर हिन्दुस्तान को एक सूत्र के पिरोने की कोशिश....
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सोमवार, 10 अगस्त 2009
दुसरों को गरियाओं और मशहुर हो जाओं...!!! Abuse Other's And Get Famous...!!!
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हिन्दू - मुस्लिम
शनिवार, 20 सितंबर 2008
इन्होने तो मुसलमानों को आतंकवादी और देशद्रोही साबित कर दिया !!
"अमिताभ बुधौलिया 'फरोग' जी" ने "भड़ास" और अपने ब्लॉग "गिद्ध" पर एक पोस्ट लिखी थी उसमे उन्होंने जो लिखा मैं उनकी भावनाओ की इज्ज़त करता हूँ लेकिन उन्होंने ना - ना करते करते आपने मुसलमानों को आतंकवादी और देशद्रोही साबित कर दिया, और बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद् की पुरी तरह से वकालत की है,
सिमी पर तो प्रतिबन्ध लगा हुआ है और सिमी ने जितने भी हमले किए उसमे से कोई भी हमला किसी धर्म विशेष पर नही था लेकिन बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद् ने सिर्फ़ एक धर्म के लोगो और उनके धर्म स्थलों को निशाना बनाया है तो उन्हें कैसे धर्म निरपेक्ष कह सकते हो? आप लोग ही बताये उन पर प्रतिबन्ध क्योँ नही लगाया जाए?
इस्लाम क्या किसी धर्म में यह नही बताया गया है की दूसरे धर्म के लोगो को जीने ना दो, उन्हें और उन्हें धर्म स्थलों को तबाह कर दो.... इस्लाम तो अपने मानने वालो को कुरान में आदेश देता है की "दुसरो के माबुदो (उपास्यो) को बुरा ना कहो (सूरा-ए-अलंफाल : आयत-१०८) |' पाक कुरान में खुदा का हुक्म है, "जिसने एक बेकुसूर का कत्ल किया, गोया उसने सारी इंसानियत का कत्ल कर दिया सूरा-ए-अल्मायेदाह : आयत - 108) |' आख़िर यह कौन से जेहादी हैं और इनका कौन सा मज़हब है, जो बेगुनाह लोगो की जान लेने को इन्हे आतुर करता है | दिल्ली बम काण्ड को ले, तो यह बात समझ नही आती की क्या कोई सच्चा मुस्लिम, और वे भी रमजान के पाक महीने में ऐसा जघन्य पाप करेगा | साफ़ है, आतंक्वादियौं का कोई धर्म और ईमान नही होता |
आज मुस्लिम समाज में कुछ लोग ऐसे हैं, जो इस्लाम की मानवतावादी शिक्षाओ से कोसो दूर हैं | ऐसे लोगो की गैर इस्लामी हरकतों से इस्लाम का नाम बदनाम होता होता है | इस्लाम का नाम बदनाम करने वाले आतंकवादी चाहे कश्मीर में हों, अफगानिस्तान में हों, पाकिस्तान में हों, अमेरिका में हों, या इंडोनेशिया में, ये सभी इंसानियत और मज़हब पर बदनुमा दाग हैं | इस्लाम अपने मानने वालो को ये आदेश भी देता है की बुढो, बच्चो और औरतों पर हथियार न उठाओ, किसी भी धर्मस्थल में बैठे हुए राहिबो व सन्यासियों पर हमला न करो | किसी ऐसे आदमी पर हमला न करो और ऐसे आदमी से न लड़ो, जो मुकाबला करने की हालत में न हो | मगर आतंकियों ने कभी इन नसीहतो को नही पढ़ा | सिर्फ़ नाम मुसलमान का और बाप - दादा के मुसलमान होने कोई मुसलमान नही हो जाता हैं,
इस्लाम एक आधुनिक धर्म है और धर्म से अधिक जीवन व्यतीत करने की कला है | इसीलिए एक आम मुस्लिम इन आतंकी हमलो की कभी हिमायत नही करता, मगर यह कुबूलने में कोई गुरेज़ नही की लगातार हो रहे आतंकी विस्फोटो के पीछे के तथाकथीत अक्स ने एक समूचे समुदाय के ऐतबार को चोट पहुचाई है |
इस्लाम को इन जेहादियों ने एक हिंसक रूप में पेश किया है, जबकि इसका नाता तो सूफी फलसफे से जुड़ा है और यह तलवार से नही, बल्कि सुफियान सोच और मोहब्बत से दुनिया भर में फैला है | पाक कुरान में तीसवें पारे (अध्याय) की सुरा-ए-अल्काफिरून में लिखा है, 'लकुम दिनोकुम वली यदिन' अर्थार्त तुम्हे तुम्हारा धर्म मुबारक, हमें हमारा धर्म मुबारक | कुरान में कहीं नही लिखा की दकाज़नी करो, खूरेंजी करो या दूसरो की जान लो | सच्चाई तो यह है की रहमदिली को इस्लाम का जौहर माना गया है |
कुछ लोग सवाल उठा सकते हैं की क्या कुरान के यह संदेश ओसामा बिन लादेन, मुल्ला उमर, मसूद अजहर आदि ने नही पढ़े होंगे? इसके जवाब में यह प्रश्न पुछा जा सकता है की क्या इस्लाम के असली ठेकेदार और मुल्ला यही लोग हैं? एक कहावत है, नीम हकीम खतरा ऐ जान और नीम मुल्ला खतरा ऐ ईमान | जेहाद का नाम लेकर बेगुनाह लोगो की हत्या कर रहे लोग शायद ये नही जानते की जेहाद का अर्थ हज़रात मोहम्मद ने अपने नफ्स (इन्द्रियों) से लड़ना बताया है |
सिमी पर तो प्रतिबन्ध लगा हुआ है और सिमी ने जितने भी हमले किए उसमे से कोई भी हमला किसी धर्म विशेष पर नही था लेकिन बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद् ने सिर्फ़ एक धर्म के लोगो और उनके धर्म स्थलों को निशाना बनाया है तो उन्हें कैसे धर्म निरपेक्ष कह सकते हो? आप लोग ही बताये उन पर प्रतिबन्ध क्योँ नही लगाया जाए?
इस्लाम क्या किसी धर्म में यह नही बताया गया है की दूसरे धर्म के लोगो को जीने ना दो, उन्हें और उन्हें धर्म स्थलों को तबाह कर दो.... इस्लाम तो अपने मानने वालो को कुरान में आदेश देता है की "दुसरो के माबुदो (उपास्यो) को बुरा ना कहो (सूरा-ए-अलंफाल : आयत-१०८) |' पाक कुरान में खुदा का हुक्म है, "जिसने एक बेकुसूर का कत्ल किया, गोया उसने सारी इंसानियत का कत्ल कर दिया सूरा-ए-अल्मायेदाह : आयत - 108) |' आख़िर यह कौन से जेहादी हैं और इनका कौन सा मज़हब है, जो बेगुनाह लोगो की जान लेने को इन्हे आतुर करता है | दिल्ली बम काण्ड को ले, तो यह बात समझ नही आती की क्या कोई सच्चा मुस्लिम, और वे भी रमजान के पाक महीने में ऐसा जघन्य पाप करेगा | साफ़ है, आतंक्वादियौं का कोई धर्म और ईमान नही होता |
आज मुस्लिम समाज में कुछ लोग ऐसे हैं, जो इस्लाम की मानवतावादी शिक्षाओ से कोसो दूर हैं | ऐसे लोगो की गैर इस्लामी हरकतों से इस्लाम का नाम बदनाम होता होता है | इस्लाम का नाम बदनाम करने वाले आतंकवादी चाहे कश्मीर में हों, अफगानिस्तान में हों, पाकिस्तान में हों, अमेरिका में हों, या इंडोनेशिया में, ये सभी इंसानियत और मज़हब पर बदनुमा दाग हैं | इस्लाम अपने मानने वालो को ये आदेश भी देता है की बुढो, बच्चो और औरतों पर हथियार न उठाओ, किसी भी धर्मस्थल में बैठे हुए राहिबो व सन्यासियों पर हमला न करो | किसी ऐसे आदमी पर हमला न करो और ऐसे आदमी से न लड़ो, जो मुकाबला करने की हालत में न हो | मगर आतंकियों ने कभी इन नसीहतो को नही पढ़ा | सिर्फ़ नाम मुसलमान का और बाप - दादा के मुसलमान होने कोई मुसलमान नही हो जाता हैं,
इस्लाम एक आधुनिक धर्म है और धर्म से अधिक जीवन व्यतीत करने की कला है | इसीलिए एक आम मुस्लिम इन आतंकी हमलो की कभी हिमायत नही करता, मगर यह कुबूलने में कोई गुरेज़ नही की लगातार हो रहे आतंकी विस्फोटो के पीछे के तथाकथीत अक्स ने एक समूचे समुदाय के ऐतबार को चोट पहुचाई है |
इस्लाम को इन जेहादियों ने एक हिंसक रूप में पेश किया है, जबकि इसका नाता तो सूफी फलसफे से जुड़ा है और यह तलवार से नही, बल्कि सुफियान सोच और मोहब्बत से दुनिया भर में फैला है | पाक कुरान में तीसवें पारे (अध्याय) की सुरा-ए-अल्काफिरून में लिखा है, 'लकुम दिनोकुम वली यदिन' अर्थार्त तुम्हे तुम्हारा धर्म मुबारक, हमें हमारा धर्म मुबारक | कुरान में कहीं नही लिखा की दकाज़नी करो, खूरेंजी करो या दूसरो की जान लो | सच्चाई तो यह है की रहमदिली को इस्लाम का जौहर माना गया है |
कुछ लोग सवाल उठा सकते हैं की क्या कुरान के यह संदेश ओसामा बिन लादेन, मुल्ला उमर, मसूद अजहर आदि ने नही पढ़े होंगे? इसके जवाब में यह प्रश्न पुछा जा सकता है की क्या इस्लाम के असली ठेकेदार और मुल्ला यही लोग हैं? एक कहावत है, नीम हकीम खतरा ऐ जान और नीम मुल्ला खतरा ऐ ईमान | जेहाद का नाम लेकर बेगुनाह लोगो की हत्या कर रहे लोग शायद ये नही जानते की जेहाद का अर्थ हज़रात मोहम्मद ने अपने नफ्स (इन्द्रियों) से लड़ना बताया है |
बुधवार, 20 अगस्त 2008
"भगवान्" का शाब्दिक अर्थ क्या है?
आप लोग पोस्ट का शीर्षक पढ़ कर चौंक गए होंगे की हिन्दुस्तानी को क्या हो गया है यह कैसा सवाल कर रहा है? तो आप लोग ज़रा अपने दिमाग को काबू में रखे और बराए मेहेरबानी इस पोस्ट को पुरा पढ़े...
आज से कुछ दिनों पहले में फैजाबाद जाने के लिए आगरा से मरुधर एक्सप्रेस में चढा था....अपने स्लीपर कोच में पहुचने के बाद मुझे पता चला की मेरा टिकेट अपग्रेड हो गया है.....भला हो लालू जी का जिनकी वजह से मुझ जैसे मद्ध्यम वर्ग के इनसां को एसी में सफर का मौका मिला था.....मैं अपने कोच में पहुच गया और लेटकर सो गया...
सुबह आँख खुली तो ट्रेन लेट थी.....हमेशा की तरह तो नीचे आकर बैठ गया वहां पर कुछ लोग आपस में बातचीत कर रहे थे और बातचीत का विषय था आज का दौर और इंसान......मैं बैठा हुआ उन लोगो की बातचीत सुनता रहा तो उनलोगों में एक चौबीस - पच्चीस साल का नौजवान था, तीन अधेड़ उम्र के लोग और मैं बैठा था.....
बात होते -२ पाप और पुण्य पर आगई तो उस नौजवान ने बोला की हमारे जिस्म में इतनी बीमारियाँ पैदा हो रही है रोज़ एक नई बीमारी की ख़बर आ रही है...उन सब बीमारियों में से सबसे ज़्यादा हमारे खून में जन्म ले रहीं है.......उसकी सबसे बड़ी वजह की हम लोग अपनर धर्म और धर्म ग्रंथो से दूर हो गए है और झूठ - बेईमानी की रोटी खा रहे है, जब हमारे जिस्म में बेईमानी और झूठ की रोटी जा रही है तो उससे बना खून भी तो ख़राब होगा.....मैं उसकी बात से पुरी तरह से सहमत था......
उसकी यह बात सुनते ही पास वाले पार्टीशन से एक अंकल जी निकल कर आ गए और उन्होंने आते ही उस लड़के की बात को काटा की ऐसा सब कहते है लेकिन कोई उस पर अमल नही कर पाता है.....यह सब बेकार की बात है इससे कुछ नही होता है......तो उसे लड़के ने पहले गीता का एक शलोक सुनाया उसके बाद कुरान की एक आयत सुनाई, फिर दोनों का मतलब बताया इस तरह बात का रुख धर्म की तरफ़ हो गया अब सिर्फ़ उन दो लोगो में बातचीत हो रही बाकी लोग सिर्फ़ सुन रहे थे काफ़ी देर तक दोनों में बहस हो रही थी अंकल जी कुछ ज़्यादा ही जज़्बात में बोल रहे थे उनकी बात में दम नही लेकिन वो लड़का जो भी बोल रहा था पहले किसी न किसी धर्म - ग्रन्थ का हवाला देकर बोल रहा था इतनी कम उम्र में उसके पास बहुत ज़्यादा जानकारी थी जिसको सुनकर में आश्चर्य में पढ़ गया था, मैं बस बैठा उसकी बात सुन रहा था अब वहां पर काफ़ी लोग जमा हो गए थे, अंकल जी के काफ़ी पढ़े लिखे थे वो बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे लेकिन जिस भाषा का इस्तेमाल वो कर रहे थे वो बहुत साम्प्रदायिक थी, जब भी वो लड़का कुरान की किसी आयत का उदाहरण देता तो वो उसे नकार देते थे, और गीता, रामायण, या और किसी हिंदू धर्म - ग्रन्थ का हवाला देता तो वो उसे कुबूल कर लेते थे यह सब देख मुझे कुछ अच्छा नही लगा की इतना बड़ा शिक्षक जिसकी उम्र लगभग ६० - ६५ के आसपास होगी वो ऐसी बात कर रहा है, जब काफ़ी देर हो गई उनको इस्लाम की बुराई करते हुए तो उस लड़के ने सिर्फ़ एक सवाल पुछा की "भगवान् किसे कहते है?" तो वहां मौजूद लोगो ने अपनी समझ के हिसाब से जवाब दिया...किसी ने कहा दुनिया को चलाने वाला, किसी ने कुछ कहा....तो उसने कहा की उसका शाब्दिक अर्थ बताये वहां मौजूद कोई भी शख्स उसके सवाल का जवाब नही दे सका....
आज से कुछ दिनों पहले में फैजाबाद जाने के लिए आगरा से मरुधर एक्सप्रेस में चढा था....अपने स्लीपर कोच में पहुचने के बाद मुझे पता चला की मेरा टिकेट अपग्रेड हो गया है.....भला हो लालू जी का जिनकी वजह से मुझ जैसे मद्ध्यम वर्ग के इनसां को एसी में सफर का मौका मिला था.....मैं अपने कोच में पहुच गया और लेटकर सो गया...
सुबह आँख खुली तो ट्रेन लेट थी.....हमेशा की तरह तो नीचे आकर बैठ गया वहां पर कुछ लोग आपस में बातचीत कर रहे थे और बातचीत का विषय था आज का दौर और इंसान......मैं बैठा हुआ उन लोगो की बातचीत सुनता रहा तो उनलोगों में एक चौबीस - पच्चीस साल का नौजवान था, तीन अधेड़ उम्र के लोग और मैं बैठा था.....
बात होते -२ पाप और पुण्य पर आगई तो उस नौजवान ने बोला की हमारे जिस्म में इतनी बीमारियाँ पैदा हो रही है रोज़ एक नई बीमारी की ख़बर आ रही है...उन सब बीमारियों में से सबसे ज़्यादा हमारे खून में जन्म ले रहीं है.......उसकी सबसे बड़ी वजह की हम लोग अपनर धर्म और धर्म ग्रंथो से दूर हो गए है और झूठ - बेईमानी की रोटी खा रहे है, जब हमारे जिस्म में बेईमानी और झूठ की रोटी जा रही है तो उससे बना खून भी तो ख़राब होगा.....मैं उसकी बात से पुरी तरह से सहमत था......
उसकी यह बात सुनते ही पास वाले पार्टीशन से एक अंकल जी निकल कर आ गए और उन्होंने आते ही उस लड़के की बात को काटा की ऐसा सब कहते है लेकिन कोई उस पर अमल नही कर पाता है.....यह सब बेकार की बात है इससे कुछ नही होता है......तो उसे लड़के ने पहले गीता का एक शलोक सुनाया उसके बाद कुरान की एक आयत सुनाई, फिर दोनों का मतलब बताया इस तरह बात का रुख धर्म की तरफ़ हो गया अब सिर्फ़ उन दो लोगो में बातचीत हो रही बाकी लोग सिर्फ़ सुन रहे थे काफ़ी देर तक दोनों में बहस हो रही थी अंकल जी कुछ ज़्यादा ही जज़्बात में बोल रहे थे उनकी बात में दम नही लेकिन वो लड़का जो भी बोल रहा था पहले किसी न किसी धर्म - ग्रन्थ का हवाला देकर बोल रहा था इतनी कम उम्र में उसके पास बहुत ज़्यादा जानकारी थी जिसको सुनकर में आश्चर्य में पढ़ गया था, मैं बस बैठा उसकी बात सुन रहा था अब वहां पर काफ़ी लोग जमा हो गए थे, अंकल जी के काफ़ी पढ़े लिखे थे वो बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे लेकिन जिस भाषा का इस्तेमाल वो कर रहे थे वो बहुत साम्प्रदायिक थी, जब भी वो लड़का कुरान की किसी आयत का उदाहरण देता तो वो उसे नकार देते थे, और गीता, रामायण, या और किसी हिंदू धर्म - ग्रन्थ का हवाला देता तो वो उसे कुबूल कर लेते थे यह सब देख मुझे कुछ अच्छा नही लगा की इतना बड़ा शिक्षक जिसकी उम्र लगभग ६० - ६५ के आसपास होगी वो ऐसी बात कर रहा है, जब काफ़ी देर हो गई उनको इस्लाम की बुराई करते हुए तो उस लड़के ने सिर्फ़ एक सवाल पुछा की "भगवान् किसे कहते है?" तो वहां मौजूद लोगो ने अपनी समझ के हिसाब से जवाब दिया...किसी ने कहा दुनिया को चलाने वाला, किसी ने कुछ कहा....तो उसने कहा की उसका शाब्दिक अर्थ बताये वहां मौजूद कोई भी शख्स उसके सवाल का जवाब नही दे सका....
इतने में उसका स्टेशन आ गया तो उसने वहां मौजूद हर शख्स को अपना मेल एड्रेस किया और कहा की आप लोग अपनी तरह से इस सवाल का जवाब पता कीजिये और मुझे बताये फिर मैं आप लोगो को बताऊँगा की "भगवान्" का शाब्दिक अर्थ क्या है?"
मुझे तो पता नही है इसलिए मैंने सोचा अपने पाठको से पूछ लूँ तो कृपया करके इस पोस्ट को पढने के बाद अपने विचार ज़रूर बताये धन्यवाद
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